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12 दिन बाद फिर शुरू हुई मध्यमेश्वर धाम की यात्रा, पहले दिन 500 से अधिक यात्री रवाना

Madhyameshwar Dham Yatra resumes after 12 days, with over 500 pilgrims leaving on the first day.

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12 दिन बाद फिर शुरू हुई मध्यमेश्वर धाम की यात्रा, पहले दिन 500 से अधिक यात्री रवाना

बीते सात अगस्त को प्रशासन ने लगा दी थी मध्यमेश्वर यात्रा पर अस्थायी रोक, अब यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी तो ट्राली स्थल पर तैनात किए जाएंगे पुलिसकर्मी, ट्राली संचालन के लिए समय हुआ निर्धारित

देहरादून, 19 अगस्त 2026: रुद्रप्रयाग जिले में समुद्रतल से 11,470 फीट की ऊंचाई पर स्थित द्वितीय केदार मध्यमेश्वर धाम की यात्रा बुधवार से दोबारा शुरू हो गई। पहले दिन 500 से अधिक यात्री धाम के लिए रवाना हुए। यात्रा के सुचारु एवं सुरक्षित संचालन के लिए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

जुलाई अंतिम सप्ताह में मोरखंडा (मधुगंगा) नदी पर बने अस्थायी पुल के बहने के बाद यात्री गौंडार और बंतोली गांव के बीच नदी पर लगी ट्राली के सहारे आवाजाही कर रहे थे। लेकिन, तीन अगस्त को ट्राली में चढ़ने के दौरान एक यात्री की नदी में गिरने से मौत हो गई। इसे देखते हुए सात अगस्त को जिला प्रशासन ने मध्यमेश्वर यात्रा पर अस्थायी रोक लगाकर मामले की जांच बैठा दी थी। मंगलवार को संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन कुछ शर्तों के साथ यह रोक हटा दी और बुधवार से यात्रा दोबारा शुरू हो गई। इससे यात्रा मार्ग से जुड़े स्थानीय कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।

हालांकि, यात्रा के दौरान ट्राली स्थल पर भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के साथ ही महिला व बुजुर्ग यात्रियों की सहायता और आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को देखते हुए ट्राली संचालन के लिए समय निर्धारित किया गया है। इसके तहत ट्राली सुबह 6:30 से नौ बजे, सुबह 10:30 से दोपहर एक बजे और फिर दोपहर 2:30 से शाम छह बजे तक संचालित होगी।

विदित हो कि 14 अगस्त 2023 को भारी वर्षा के चलते मोरखंडा नदी के सैलाब में मधुगंगा नदी पर बना लोहे का गार्डर पुल भी बह गया था। तब लगभग 300 तीर्थयात्री वहां फंस गए थे, जिन्हें हेलीकाप्टर से से रेस्क्यू करना पड़ा। इसके बाद से यहां अस्थायी पुल से ही आवाजाही होती आ रही है। वर्षाकाल में नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह पुल बह जाता है और फिर वर्षाकाल की समाप्ति के बाद दोबारा कच्चा पुल बनाया जाता है।

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