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अढूंड़ी उत्सव : उत्तराखंड के दयारा बुग्याल खेली जाएगी आज दूध-मक्खन की अनूठी होली

Adhundi Festival: A unique Holi of milk and butter will be celebrated today in Dayara Bugyal, Uttarakhand.

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अढूंड़ी उत्सव : उत्तराखंड के दयारा बुग्याल खेली जाएगी आज दूध-मक्खन की अनूठी होली

  • यह आयोजन ‘अढूंड़ी उत्सव’ के नाम से हर साल भाद्रपद संक्रांति को उत्तरकाशी जिले के उपला टकनौर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान) में होता है।

  • प्रकृति को समर्पित इस लोक उत्सव को अब ‘बटर फेस्टिवल’ भी कहा जाने लगा है, जिसमें रैथल, नटीण, भटवाड़ी, क्यार्क, बंद्राणी आदि गांवों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं

रजनी कुकरेती, 16 अगस्त 2026
होली रंग और फूलों से ही नहीं, भस्म से भी खेली जाती है, लेकिन क्या आपने लोगों को कभी दूध-मक्खन की होली खेलते भी देखा है। उत्तराखंड हिमालय में ऐसी ही अनूठी होली खेली जाती है। यह आयोजन ‘अढूंड़ी उत्सव’ के नाम से हर साल भाद्रपद संक्रांति को उत्तरकाशी जिले के उपला टकनौर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान) में होता है। इसमें स्थानीय ग्रामीणों के साथ देश-विदेश के पर्यटक भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। प्रकृति को समर्पित इस लोक उत्सव को अब ‘बटर फेस्टिवल’ भी कहा जाने लगा है, जिसमें रैथल, नटीण, भटवाड़ी, क्यार्क, बंद्राणी आदि गांवों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस बार 17 अगस्त को यह खास दिन पड़ रहा है।

प्रकृति के प्रति आभार जताने का उत्सव

भटवाड़ी ब्लाक स्थित रैथल गांव के लोग हर साल गर्मियों की दस्तक होते ही मवेशियों के साथ छह किमी दूर दयारा बुग्याल स्थित अपनी पांरपरिक छानियों में चले जाते हैं। दयारा बुग्याल जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 42 किमी दूर समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। बुग्यालों को आदर्श चारागाह माना गया है। यहां उगने वाली अल्पाइन घास के आहार से मवेशियों के दूध में अप्रत्याशित वृद्धि होने लगती है और लोगों के घरों में संपन्नता आ जाती है। इसलिए अगस्त मध्य में सर्दी की दस्तक होने पर गांव वापस लौटने से पूर्व वे प्रकृति का आभार जताना नहीं भूलते और इसकी अभिव्यक्ति होती है अंढूड़ी उत्सव के रूप में। इस उत्सव को वे पीढ़ियों से मनाते चले आ रहे हैं।

मक्खन की हांडी तोड़कर होती है शुरुआत

अंढूड़ी उत्सव में शामिल होने के लिए गाजे-बाजों के साथ पंचगाई रैथल समेत नटीण, बंद्राणी, क्यार्क, भटवाड़ी के आराध्य समेश्वर देवता की डोली और पांडवों के पश्वा दयारा बुग्याल पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार इस दौरान समेश्वर देवता कफुवा डांगरियों (छोटी कुल्हाड़ी) पर चलकर मेलार्थियों को आशीष देते हैं। फिर वन देवता समेत स्थानीय देवी-देवताओं को छानियों से एकत्रित दूध, दही, मट्ठा व मक्खन का भोग लगाने के साथ राधा-कृष्ण बने युवा मक्खन की हांडी तोड़ते हैं और शुरू हो जाता है अंढूड़ी उत्सव का जश्न। लोग एक-दूसरे पर दूध-मक्खन डालकर होली खेलते हैं। इसके दीदार को यहां पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है।

बिखरती है लोकरंग की मनमोहक छटा

अंढूड़ी उत्सव के दौरान पर्यटकों को मंडुवा और गेहूं के आटे की रोटी के साथ मक्खन, घी, दूध, दही और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। साथ ही बिखरती है पारंपरिक लोकनृत्य रासो व तांदी की मनमोहक छटा। ढोल-दमाऊ की मधुर लहरियों पर महिला व पुरुषों की टोली के थिरकते कदम समां बांध देते हैं। प्रतीत होता है, मानो पूरी प्रकृति झूम रही हो।

पहले गाय के गोबर से खेली जाती थी होली

दयारा में पहले गाय के गोबर से होली खेली जाती थी। कालांतर में यह उत्सव पर्यटन से जुड़ा तो ग्रामीण दूध-मक्खन-मट्ठे की होली खेलने लगे। इससेअंढूड़ी उत्सव को ‘बटर फेस्टिवल’ के रूप में व्यापक पहचान मिली। स्थानीय लोग मानते हैं कि अल्पाइन घास की वजह से ही उनके मवेशी पलते हैं और उन्हें पौष्टिक दूध मिलता है। इस फेस्टिवल में राधा-कृष्ण की भी प्रतीकात्मक पूजा की जाती है।

पहली बार 2006 में हुआ था व्यापक स्तर पर आयोजन

पहली बार वर्ष 2006 में दयारा पर्यटन उत्सव समिति ने अंढूड़ी उत्सव को देश-विदेश में पहचान दिलाने के लिए व्यापक स्तर पर इसके आयोजन का निर्णय लिया। तब इस उत्सव में बड़ी तादाद में देश-विदेश के पर्यटक पहुंचे। विशेष यह कि विश्व में सिर्फ दयारा बुग्याल में ही ऐसा अनूठा आयोजन होता है, जिसमें लगभग दो क्विंटल मट्ठा, सौ किलो मक्खन और बड़ी मात्रा में दूध व दही का भी उपयोग होता है।

स्पेन में होता है ‘ला टोमाटीना’ फेस्टिवल

दयारा बटर फेस्टिवल की तर्ज पर स्पेन में भी टमाटर की होली खेली जाती है, जिसे ‘ला टोमाटीना’ फेस्टिवल कहते हैं। अगस्त में ही आयोजित होने वाले इस उत्सव में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं और लगभग 2.50 लाख पाडंड टमाटरों का प्रयोग किया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1945 में हुई थी। असल में एक धरना-प्रदर्शन के चलते कुछ लोगों ने स्पेन में अनोखे ढंग से प्रदर्शन किया। पुलिस ने लोगों को रोकना चाहा तो, उन्होंने पास में मौजूद सब्जी की दुकानों से सब्जियों और फलों को उठाकर पुलिस पर फेंकना शुरू कर दिया। इस तरह हुई ‘ला टोमाटीना’ फेस्टिवल की शुरुआत।

दयारा में बिखरा है जैव विविधता का खजाना

दयारा बुग्याल में रंग-विरंगे जंगली फूल, अल्पाइन जड़ी-बूटी, तितली व पशु-पक्षियों की समृद्ध विविधता देखने को मिलती है। इस ट्रेक पर हिमालयी नीले खसखस, आर्किड, रोडोडेंड्रोन, हिमालयी मोनाल, तीतर, चील, कस्तूरी मृग, हिमालयी काला भालू, लोमड़ी आदि का दीदार भी हो जाता है। आप यहां से बंदरपूंछ, गंगोत्री पर्वतमाला, श्रीकांत श्रेणी, ब्लैक पीक, द्रौपदी का डांडा आदि चोटियों को भी निहार सकते हैं।

Global Ganga News

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