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पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, नरभक्षी है या नहीं, आज चलेगा इसका पता
Leopard trapped in a cage; whether or not it is a man-eater will be determined today.

पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, नरभक्षी है या नहीं, आज चलेगा इसका पता
पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक स्थित ग्राम पंचायत बछेली का लगानू गांव, गदेरे में लगाया गया था यहां पिंजरा। बछेली, तरुली और लगानू के ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, पूरी तरह स्वस्थ्य है सात से आठ वर्षीय यह नर गुलदार
देहरादून, 05 नवंबर 2026: पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक की ग्राम पंचायत बछेली के लगानू गांव स्थित गदेरे में एक नर गुलदार पिंजरे में कैद हुआ है। उसकी उम्र सात से आठ वर्ष बताई जा रही है। वह आदमखोर है या नहीं, इसका पता शुक्रवार को रिपोर्ट मिलने के बाद चल पाएगा। गुलदार के पकड़े जाने से बछेली, तरुली और लगानू के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। वहीं, वन विभाग क्षेत्र में अन्य गुलदारों की सक्रियता को लेकर ट्रैप व सोलर कैमरे भी खंगाल रहा है।
गुरुवार तड़के लगानू गांव स्थित गदेरे में लगे पिंजरे में एक गुलदार कैद हो गया। वहां से गुजर रहे स्थानीय लोगों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। टीम ने मौके पर पहुंचकर पिंजरे को कब्जे में ले लिया और उसे पौड़ी ले गई। वहां पशु चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच में गुलदार को नर और उसकी उम्र सात से आठ वर्ष बताई। गुलदार पूरी तरह स्वस्थ है। गढ़वाल वन प्रभाग की एसडीओ आइसा बिष्ट ने बताया कि गुलदार के आदमखोर होने की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की जाएगी। बताया कि लगानू से तरुली-अमदार तक टीम निरंतर गश्त कर रही थी। अब, गुलदार के पिंजरे में पकड़ने जाने के बाद गश्त में लगे कार्मिकों की संख्या घटाई जाएगी।
विदित हो कि बीते नौ अक्टूबर को गुलदार ने तरुली गांव निवासी बीना देवी को मार दिया था। अगले दिन ग्रामीणों ने खंडाह में श्रीनगर-पौड़ी-कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया था। इस पर, वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने के साथ गांव में 18 सदस्यीय टीम तैनात कर दी थी। साथ ही कई जगहों पर ट्रैप कैमरा व सोलर कैमरा लगाए गए थे, लेकिन गुलदार का पता नहीं चल पाया। अब, गुलदार के पिंजरे में कैद होने के बाद ग्राम पंचायत बछेली के प्रधान कुलदीप सिंह गुसाई ने बताया कि गुलदार के पकड़े जाने से ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, अब भी क्षेत्र में कई गुलदार सक्रिय हो सकते हैं, लिहाजा वन विभाग को गश्त जारी रखनी चाहिए। बताया कि दीपावली अवकाश के बाद अब स्थानीय स्कूली बच्चे स्वयं के संसाधनों से ही स्कूल जाएंगे।


