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भालू को जंगल में खदेड़ेगी ग्राम वालंटियर प्रोटेक्शन फोर्स

The Village Volunteer Protection Force will drive the bear away into the forest.

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भालू को जंगल में खदेड़ेगी ग्राम वालंटियर प्रोटेक्शन फोर्स

केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने चमोली जिले के भालू प्रभावित गांव बंगथल व रडुवा में ग्राम वालंटियर प्रोटेक्शन फोर्स का किया गठन,  ग्रामीणों के माध्यम से ही भालू को गांव से जंगल की ओर भगाने की रणनीति

देहरादून, 06 नवंबर 2026: चमोली जिले के पोखरी क्षेत्र को भालू के आतंक से निजात दिलाने में वन विभाग अब तक नाकाम ही रहा है। सो, अब केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग भालू प्रभावित गांवों में ग्राम वालंटियर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन कर ग्रामीणों को ही भालू को भगाने के लिए आगे करने की रणनीति बना रहा है। इसकी शुरुआत बंगथल व रडुवा से की जा रही है।

पोखरी क्षेत्र पिछले एक साल से भालू के आतंक से त्रस्त है। यहां भालू अब तक दो महिलाओं की जान ले चुका है और चार लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा ग्रामीणों के 18 से अधिक मवेशी भी भालू के हमले में मारे गए। हैरत देखए कि वन विभाग की गश्त के बाद भी भालू का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में वन विभाग अब ग्रामीणों को ही भालू की पहहरेदारी पर लगाने की रणनीति बना रहा है। वन्य जीव प्रभाग की ओर से ग्राम वालंटियर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन कर गांव के 20 से अधिक पुरुष व महिलाओं को इससे जोड़कर भालू की चौकसी कराई जाएगी। इसके लिए बजट की व्यवस्था के साथ उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

भालू के गांव में घुसने पर ये प्रशिक्षित ग्रामीण  वन कर्मियों का इंतजार किए बगैर खुद ही उसे जंगल तक खदेड़ेंगे। इस फोर्स को वन कर्मियों की टीम की भी मदद मिलती रहेगी। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने बताया कि पोखरी क्षेत्र में एक से अधिक भालू सक्रिय हैं। इसलिए अब ग्राम वालंटियर प्रोटेक्शन फोर्स बनाकर ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। कहा कि प्रथम चरण में बंगथल व रडुवा में इस फोर्स का गठन किया जा रहा है। भविष्य में सभी जंगलों से लगे व भालू प्रभावित गांवों में ग्राम वांलटियर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन कर जंगली जानवरों से सुरक्षा की पहल की जाएगी।

पोखरी में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की ओर से लगाए गए ट्रेप कैमरे में भालू की गतिविधियां दर्ज हुई है। ट्रेप कैमरे में होने के बाद भालू के पंजों के निशान व मल का सैंपल भी लिया गया है। इनका मिलान गांवों के आसपास आतंक मचाने वाले भालू के पंजों व मल से किया जा रहा है। भालू के आमने सामने होने की स्थिति में उसे ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में कैद करने की रणनीति है। वन दारोगा आनंद सिंह रावत ने बताया कि वे टीम के साथ प्रभावित गांवों डुंगर, बंगथल व जौरासी में गश्त कर रहे हैं।

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