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कोटद्वार में गढ़वाल की वीरांगना तीलू रौतेली पर जारी हुआ डाक टिकट 

A postage stamp was issued in Kotdwar on Garhwal's heroine Teel Rauteli.

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कोटद्वार में गढ़वाल की वीरांगना तीलू रौतेली पर जारी हुआ डाक टिकट

तीलू रौतेली चौक पर वीरबाला तीलू रौतेली विचार मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में महापौर शैलेंद्र सिंह रावत, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी व पूर्व महापौर हेमलता नेगी ने डाक विभाग के अधिकारियों के साथ डाक टिकट का किया विमोचन, पैतृक गांव गुराड़ तल्ला में भी किया गया इस वीरबाला को याद

देहरादून, 08 अगस्त 2026: वीरांगना तीलू रौतेली के जन्म दिवस पर उनके पैतृक गांव समेत विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में उनके नाम से डाक टिकट भी जारी किया गया। तीलू रौतेली का जीवन संघर्ष, साहस और देशप्रेम की मिसाल है। उनकी वीरगाथा आज भी युवाओं को विपरीत परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा देती है।

कोटद्वार के तीलू रौतेली चौक पर वीरबाला तीलू रौतेली विचार मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में महापौर शैलेंद्र सिंह रावत, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी व पूर्व महापौर हेमलता नेगी ने डाक विभाग के अधिकारियों के साथ डाक टिकट का विमोचन किया। कहा गया कि तीलू रौतेली का जीवन उत्तराखंड की वीर परंपरा, नारी शक्ति व मातृभूमि के प्रति समर्पण का अद्वितीय प्रतीक है। तीलू की वीरता इस बात का प्रमाण है कि साहस व दृढ़ संकल्प के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी पड़ जाती है। वहीं, विकासखंड बीरोंखाल के कांडा मल्ला में ग्रामीणों व महिला मंगल दल ने वीरबाला के चित्र पर पुष्प अर्पित उनका स्मरण किया।

महिला मंगल दल ने लोकगीत ‘कांडा कू कौथीग धकी-धैं, धैं-धैं, तीलू रौतेली धकी-धैं, धैं-धैं’ के माध्यम से वीरबाला तीलू रौतेली की शौर्यगाथा प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। जिला पंचायत सदस्य अनूप पटवाल ने कहा कि तीलू  की वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने क्षेत्र में तीलू रौतेली की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए कांडा मल्ला में प्रशासनिक मेले के आयोजन की मांग रखी। साथ ही टकोलीखाल से कांडा तक तीलू विजय पथ विकसित किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कहा कि तीलू रौतेली की जन्म एवं कर्मभूमि को उनकी वीरगाथा से जोड़ते हुए पर्यटन व सांस्कृतिक दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

वीरबाला तीलू रौतेली के पैतृक गांव गुराड़ तल्ला में आयोजित कार्यक्रम में उनके अदम्य साहस, शौर्य व वीरता को नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि तीलू रौतेली का जीवन संघर्ष, साहस और देशप्रेम की मिसाल है। उनकी वीरगाथा आज भी युवाओं को विपरीत परिस्थितियों में डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा देती है। कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके त्याग और वीरता से परिचित कराना हम सब की जिम्मेदारी है। कहा कि तीलू रौतेली की वीरता और संघर्ष से सभी को सीख लेनी चाहिए और उनकी गौरवशाली गाथा को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। पब्लिक इंटर कालेज सुरखेत के आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य पुष्कर सिंह नेगी ने छात्र-छात्राओं को तीलू रौतेली के जीवन व वीरता की जानकारी दी।

1661 में राजा फतेहशाह के सेनापति भूप सिंह के घर जन्मी थीं तीलू

चौंदकोट गढ़वाल के गोर्ला रौत थोकदार और गढ़वाल रियासत के राजा फतेहशाह के सेनापति भूप सिंह की बेटी तीलू का जन्म वर्ष 1661 में हुआ था। तीलू के दो बड़े भाई थे पत्वा और भक्तू। बाल्यकाल में ही उसकी सगाई ईड़ गांव के सिपाही नेगी भवानी सिंह के साथ कर दी गई। तीलू का असली नाम तिलोत्मा था। चौंदकोट में पति की बड़ी बहन को ‘रौतेली’ संबोधित किया जाता है। बेला और देवकी भी तीलू को ‘तीलू रौतेली’ कहकर बुलाती थीं। वीर पत्वा और भक्तू की छोटी बहन तीलू बचपन से तलवार के साथ खेलते हुए बड़ी हुईं। बचपन में ही तीलू ने अपने लिए सबसे सुंदर घोड़ी ‘बिंदुली’ का चयन कर लिया था। 15 वर्ष की होते-होते गुरु शिबू पोखरियाल ने तीलू को घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण कर दिया।

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