अध्यात्मउत्तराखंडचारधाम यात्रातीर्थाटनधर्म-परम्पराएंराष्ट्रीयसंस्कृति

अपने-अपने धाम में विराजमान हुईं मां गंगा-यमुना, शुरू हुई हिमालय की चारधाम यात्रा

Mother Ganga and Yamuna are seated in their respective abodes, the Chardham Yatra of the Himalayas begins

खबर को सुनें


अपने-अपने धाम में विराजमान हुईं मां गंगा-यमुना, शुरू हुई हिमालय की चारधाम यात्रा

 

अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विधि-विधान पूर्वक खोले गये दोनों धामों के कपाट, पहले दिन 12,600 श्रद्धालुओं ने किए मां गंगा-यमुना के दर्शन, 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को खोले जाएंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

देहरादून, 19 अप्रैल 2026: चारधाम में प्रथम व द्वितीय यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया पर्व पर रविवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गये। इसी के साथ उत्तराखंड हिमालय की चारधाम यात्रा शुरू हो गई। पहले दिन 12,600 श्रद्धालुओं ने मां गंगा व यमुना के दर्शन का पुण्य अर्जित किया। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 24 अप्रैल को खोले जाएंगे। इसी के साथ चारधाम यात्रा भी पूर्णता को प्राप्त कर लेगी।

परंपरा के अनुसार बीते शनिवार को मां गंगा की उत्सव डोली यात्रा शीतकालीन प्रवास मुखवा (मुखीमठ) से रात्रि विश्राम के लिए अपने पहले पड़ाव भैरोंघाटी स्थित भैरव मंदिर पहुंची थी। 14वीं राजपूताना राइफल्स के बैंड की मधुर लहरियों के बीच रविवार सुबह यहां से डोली गंगोत्री धाम पहुंची, जहां श्री गणेश पंचांग पूजन, श्री गंगा सहस्त्रनाम पाठ के बाद 3,050 श्रद्धालुओं की मौजदूगी में मंत्रोच्चार के बीच धाम के कपाट खोल दिये गए।

वहीं, यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली (खुशीमठ) से आईटीबीपी के बैंड की मधुर लहरियों के बीच मां यमुना की उत्सव डोली अपने भाई शनिदेव (सोमेश्वर देवता) की अगुआई में यमुनोत्री धाम पहुंची। वहां हवन-पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए और फिर तय लग्न में धाम के कपाट खोल दिये गए। इस मौके पर 9, 550 श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किये।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button