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देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए खुली विश्व धरोहर फूलों की घाटी
Valley of Flowers, a world heritage site, is open for tourists from across the country and the world

देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए खुली विश्व धरोहर फूलों की घाटी
विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सुबह आठ बजे खोला गया बेस कैम्प घांघरिया के पास स्थित फूलों की घाटी का गेट, पहले दिन 108 पर्यटकों ने की घाटी के मनमोहक संसार की सैर, 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी घाटी

देहरादून, 01 जून 2026: विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार सुबह आठ बजे देश- दुनिया के पर्यटकों के लिए खोल दी गई। पहले दिन 108 पर्यटकों ने घाटी के मनमोहक संसार की सैर की। इनमें 70 पुरुष, 11 महिलाएं, 24 छात्र-छात्राएं व तीन बच्चे शामिल थे। अब पर्यटक 31 अक्टूबर तक घाटी की सैर कर सकेंगे।
चमोली जनपद में 12,995 फ़ीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली घाटी के बेस कैम्प घांघरिया के पास स्थित गेट को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खोला गया। वन क्षेत्राधिकारी फूलों की घाटी चेतना कांडपाल व पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक अमनदीप सिंह समेत वनकर्मियों, स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों की मौजूदगी में भगवान लोकपाल व वन देवताओं का आह्वान कर पर्यटकों के पहले दल को फूलों की घाटी में प्रवेश दिया गया।

जैवविविधता का अनूठा खजाना
घाटी में जैवविविधता का अनूठा खजाना बिखरा हुआ है। 500 से अधिक प्रजाति के रंग-बिरंगे फूलों के साथ तमाम दुलर्भ वन्य जीवों का यह क्षेत्र प्राकृतिक वास स्थल है। यहां पर हिमालयन थार, कस्तूरा मृग, हिम तेंदुआ, काला भालू, भूरा भालू, भरल (नीली भेड़) व उड़न गिलहरी समेत अन्य वन्य जीव आसानी से देखे जा सकते हैं। इसके अलावा यहां दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों और तितलियों का भी अनूठा संसार है। फूलों की घाटी का आकर्षण कभी कम नहीं होता। यहां हर 15 दिन के अंतराल में
अलग-अलग प्रजाति के फूल खिलने से घाटी अपना रंग बदल देती है। इससे ऐसा प्रतीत होता है, मानो घाटी ने नए रंग का आवरण ओढ़ लिया है।

घाटी का आकर्षण है निर्मल-धवल पुष्पावती नदी
पर्यटकों को फूलों की घाटी में पांच किमी क्षेत्र तक जाने की ही अनुमति है। घाटी के बीच से होकर पुष्पावती नदी भी बहती है, जिसका साफ पानी लोगों को मोहित करता है। ज़ांस्कर पर्वतमाला के ऊंचे पहाड़ों में स्थित टिपरा हिमनद और कामेट पर्वत क्षेत्र से निकलने वाली यह नदी क्षेत्र के ईको सिस्टम और 500 से अधिक प्रजाति की वनस्पतियों को पोषित करती है। घाटी की सैर के दौरान पुष्पावती नदी के किनारे का हिस्सा सबसे सुंदर एवं शांत माना जाता है। पर्यटकों को इसे पार करने के लिए अस्थायी पुलों का उपयोग करना पड़ना है। इसके किनारों पर एपिलोबियम जैसे रंग-बिरंगे जंगली फूल और जड़ी-बूटियां उगती हैं, जो घाटी के नज़ारों को बेहद आकर्षक बनाते हैं।

ऐसे पहुंचें
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ऋषिकेश से ज्योतिर्मठ होते हुए गोविंदघाट तक निजी या सार्वजनिक वाहन से
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गोविंदघाट से पुलना तक तीन किमी का सफर शटल सेवा से
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पुलना से बेस कैंप घांघरिया तक 10 किमी पैदल
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घांघरिया से फूलों की घाटी तक तीन किमी पैदल
अन्य जानकारियां
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घांघरिया स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के कार्यालय में कराएं पंजीकरण
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यहीं कराएं घाटी की सैर के लिए निर्धारित शुल्क
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भोजन समेत अन्य जरूरी सामग्री साथ ले जाएं
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साथ ले जाई गई प्लास्टिक की वस्तुओं को वापसी में अनिवार्य रूप से साथ लेकर आएं
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घाटी में किसी भी वनस्पति को नुकसान न पहुंचाएं





