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युवा कवियों ने साझा की अपनी नई कविताएं, दून पुस्तकालय ने दिया अभिव्यक्ति का मंच

Young poets shared their new poems; Doon Library provided a platform for expression.

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युवा कवियों ने साझा की अपनी नई कविताएं, दून पुस्तकालय ने दिया अभिव्यक्ति का मंच

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की भूमिका पुस्तकों के संग्रह व पठन-पाठन के अलावा ज्ञान, विचार, साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक संवाद के प्रति भी है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। युवाओं को साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में मंच उपलब्ध कराना इसी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शोध केन्द्र भविष्य में भी युवा कवियों, लेखकों, पाठकों और साहित्य प्रेमियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने वाले ऐसे आयोजनों को मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध  रहेगा।

देहरादून, 27 सितंबर, 2026:  दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र नवोदित प्रतिभाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बनकर उभरा है। शनिवार को इस मंच पर आयोजित ‘युवा कवि सम्मेलन’ उभरती प्रतिभाओं ने अपनी नई कविताओं का पाठ करते हुए समकालीन जीवन, समाज, मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, प्रकृति और बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़े विविध विषयों को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य उभरती साहित्यिक प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें व्यापक स्तर पर पाठक एवं श्रोता समुदाय से जोड़ना था।

कवि सम्मेलन में अन्य राज्यों के आए कलाक़ारों ने भी शिरकत की। कार्यक्रम की सदारत मीरा नवेली ने की। दिल्ली से आई मोनिका सिंह मोह ने पढ़ा- ‘मुझको सिले की आरज़ू कल थी न आज है, मैं खुश हूँ अपनी नेकियां दरिया में डाल कर।’ मीना सिंह मीन ने पढ़ा- ‘जब तरक्की के किसी रंग में ढल जाते हैं, गैर तो गैर हैं अपने भी बदल जाते हैं।’ आशा किरन कहती हैं- ‘मैं टूटूगीं बेतहाशा अंदर ही अंदर, तुम भ्रम में रहना सब ठीक है।’ ज्योति की पंक्तियां देखिये- ‘इश्क़ की तामील में हमने लहू तक दे दिया, बेवफा मेहबूब तो फिर भी है प्यासा देखिये।’

सम्मेलन में बदरुद्दीन ज़िया, शाख दूनवी, राही नहटौरी,  मोनिका मंतशा, सचिन परवाना, आशा किरण, आयुष शर्मा, नीलेश शर्मा, सागर डंगवाल, नेत्रा थपलियाल, राजीव बिल्ला ‘मुसव्विर’, प्रियंका नेगी, परवाना, सीमा पासी व मोहिनी जुगराण ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर वाह-वाही लूटी। मंच के संस्थापक कुलदीप धरवाल ने बताया की ऐसे कार्यक्रम से लोगों में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ती है और ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन होता रहना चाहिए।

कवियों की रचनाओं में व्यक्तिगत अनुभव और संवेदनाओं के साथ वर्तमान समाज की अनेक स्थितियों, मानवीय संबंधों और जीवन के बदलते स्वरूप की झलक दिखाई दी। श्रोताओं ने रचनाओं को गंभीरता और आत्मीयता से सुना। कई कविताओं ने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को विचार और संवाद के लिए भी प्रेरित किया।

युवा कवियों का कहना था कि नई पीढ़ी में रचनात्मक ऊर्जा और साहित्य के प्रति गहरी रुचि है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा रचनाकारों को अपनी रचनाओं को सामने रखने, पाठकों व साहित्यकारों के साथ संवाद करने के पर्याप्त अवसर मिलें। ऐसे मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ उनके लेखन को निरंतर विकसित करने में भी सहायक होते हैं।

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