
उत्तराखंड के अध्ययन दल ने देखी ओडिशा में संस्कृति, विकास और तकनीक की नई तस्वीर
– उड़ीसा में रेल कॉरिडोर परियोजना, सेमीकंडक्टर परियोजना और सुभद्रा योजना के बारे में पत्रकारों से साझा की गई विस्तृत जानकारी
– पांच दिवसीय भ्रमण के तहत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के अवलोकन के साथ हुई पत्रकारों के पहले दिन की शुरूआत
– मीडिया प्रतिनिधियों ने कोणार्क सूर्य मंदिर और विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक धरोहर गांव रघुराजपुर का दौरा भी किया
भुवनेश्वर, 23 मार्च 2026: उत्तराखंड से शैक्षिक भ्रमण पर भुवनेश्वर पहुंचे 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और राज्य के विकास मॉडल को समझने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल से रेल कॉरिडोर, सेमी कंडक्टर व सुभद्रा योजना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने पीआईबी ओडिशा के एडीजी अखिल कुमार मिश्रा से भी भेंट की। मिश्रा ने उत्तराखंड के सभी पत्रकारों का पारंपरिक पट्टा पहनाकर स्वागत किया।

अध्ययन दल के पांच दिवसीय भ्रमण के पहले दिन का कार्यक्रम ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के अवलोकन के साथ शुरू हुआ। इस दौरान दल ने विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का भ्रमण किया। दल ने कोणार्क सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला, यूनेस्को की धरोहर के रूप में इसकी पहचान और ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में विस्तृत जानकारी ली। मंदिर की भव्य शिल्पकला और पत्थरों पर उकेरी गई कलात्मक संरचनाओं ने सभी को आकर्षित किया।

इसके बाद अध्ययन दल ने कोणार्क संग्रहालय का भी दौरा किया, जहां मंदिर से जुड़े प्राचीन अवशेष, मूर्तियां और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं। संग्रहालय के माध्यम से पत्रकारों को कोणार्क मंदिर के निर्माण, उसके इतिहास और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

मीडिया प्रतिनिधियों ने विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक धरोहर गांव रघुराजपुर का दौरा भी किया, जिसे उसकी पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस दौरान पत्रकारों ने गांव की पारंपरिक जीवन शैली, लोककला और हस्तशिल्प से जुड़ी गतिविधियों को करीब से देखा। रघुराजपुर में लगभग 160 परिवार निवास करते हैं और अधिकांश परिवार पीढ़ियों से पारंपरिक कला जैसे पट्टा चित्र पेंटिंग, ताड़पत्र चित्रकला, लकड़ी एवं कपड़े पर कलात्मक कार्य व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जुड़े हुए हैं। स्थानीय कलाकारों ने पट्टा चित्र कला की प्रक्रिया, उसके इतिहास एवं संरक्षण के प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कलाकारों ने बताया कि यह गांव पूरी तरह कला आधारित है और यहां लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में पारंपरिक हस्तशिल्प का कार्य किया जाता है।

भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने रघुराजपुर की सांस्कृतिक विरासत, कला परंपरा और यहां के कलाकारों के जीवन से जुड़ी जानकारी को भी संकलित किया। मीडिया प्रतिनिधियों ने कहा कि यह गांव देश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण उदाहरण है और यहां की कला परंपरा को देश-विदेश में और अधिक पहचान मिलनी चाहिए।

पीआईबी ओडिशा के एडीजी अखिल कुमार मिश्रा ने कहा ओडिशा में रेल कॉरिडोर योजना राज्य के खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ने की एक बड़ी पहल है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने लगभग ₹28 हजार करोड़ का बजट प्रावधान किया है। इससे कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों का परिवहन तेज और सस्ता होगा। नई रेल लाइनों से पारादीप व धामरा जैसे पोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। यह परियोजना उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी। सामान्य रेलवे ट्रैफिक पर दबाव कम होगा और लॉजिस्टिक्स बेहतर होंगे। इसे ओडिशा के आर्थिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक और गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है।

उन्होंने बताया उड़ीसा में सेमीकंडक्टर योजना लागू हो चुकी है और कई प्रोजेक्ट शुरू हो गए हैं। भुवनेश्वर में चिप निर्माण और पैकेजिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं। करीब ₹4,000–₹4,600 करोड़ से अधिक का निवेश हो रहा है, जिससे हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और डिफेंस सेक्टर को मजबूती देगी और भारत की विदेशी चिप निर्भरता को कम करेगी। उड़ीसा एक बड़े टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभर रहा है।





