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आज कुरुड़ सिद्धपीठ में में विराजमान हो जाएंगी मां नंदा

Today, Maa Nanda will be enshrined at the Kurud Siddha Peeth.

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आज कुरुड़ सिद्धपीठ में में विराजमान हो जाएंगी मां नंदा

मंगलवार को ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी, रामणी के त्योंणा रचकोटी देवता और घूनी के गोरिया ने ली नंदा से विदाई, इसके बाद पीरी के पल्टीनधार से अकेले ही गुलाड़ी वादुक होते हुए फरखेत गांव पहुंची मां नंदा, बुधवार को पहुंचेंगी कुरुड़

देहरादून, 22 सितंबर 2026: कैलास के प्रवेशद्वार होमकुंड से वापसी कर रही हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा की बड़ी जात के लिए आज बेहद भावुक कर देने वाला दिन था। ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी, रामणी के त्योंणा रचकोटी देवता और घूनी के गोरिया राजा ने आज जब पीरी के पल्टीनधार व गौरीखाना में नंदा से विदाई ली तो यह दृश्य देख श्रद्धालुओं के नेत्र छलक पड़े। यहां से नंदा कुरुड़ के लिए अकेले ही रवाना हुईं।

पुजारी मुंशी चंद्र गौड़, जर्नादन प्रसाद गौड़ व विपिन गौड़ समेत अन्य पुजारियों ने पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा की बड़ी जात में शामिल देव डोली व छंतोलियों को अपने गंतव्य के लिए विदा किया। यहां से बड़ी जात पूजा-अर्चना के बाद पीरी के पल्टीनधार से गुलाड़ी वादुक होते हुए फरखेत गांव पहुंची। बुधवार को नंदा कुरुड़ पहुंचकर वहां सिद्धपीठ में विराजमान हो जाएंगी। यात्रा में मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर सिंह रौतेला, हर्षवर्धन बिष्ट व मोहन सिंह समेत बड़ी संख्या में नंदा भक्त शामिल हैं।

किरुली मंदिर में विराजमान हुए बंड भूम्याल व गेंदाणु देवता

बड़ी जात में शामिल बंड परगने की नंदा डोली, बंड भूम्याल की छंतोली व गेंदाणु देवता की छंतोली भी मंगलवार को किरुली गांव स्थित मंदिर में विराजमान हो गईं। इससे पूर्व, सुबह 11 बजे डोली-छंतोली के कोंटा किरुली पहुंचने पर बंड मंदिर समिति, बंड विकास संगठन व ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। इस मौके पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप देव पुष्प ब्रह्मकमल दिया गया।

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