
चमोली, 31अगस्त 2025: इन दिनों पूरा उत्तराखंड मानसून के कहर से जूझ रहा है। खासकर पर्वतीय जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं। लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चमोली जनपद में बारिश ने एक बार फिर कहर बरपाया है, जहां चीन सीमा को जोड़ने वाले नीति–मलारी हाईवे पर तमक के पास पुल बह जाने से घाटी के दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है। इन गांवों तक आवाजाही बंद होने से ग्रामीण दिक्कत में है। आवश्यक सामान भी नहीं पहुंच पा रहा। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग बहाल करने की कोशिश की जा रही हैं।
पिछले कई दिनों से प्रदेश में कहीं अतिवृष्टि तो कहीं बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं। इससे नदी-नाले उफान पर हैं। कई जिलों में भूस्खलन से भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं और जानमाल की क्षति भी हुई है। भूस्खलन से सड़कें भी प्रभावित हैं। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक एक दर्जन के करीब मुख्य मार्ग भूस्खलन के कारण या तो पूरी तरह बंद हैं या लगातार बाधित हो रहे हैं। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्यानाचट्टी, जर्जर गाड, बनास और नारदचट्टी के पास जगह-जगह मलबा आने से बंद पड़ा है। गंगोत्री हाईवे भी धरासू बैंड और नेताला के पास भारी भूस्खलन होने से अवरुद्ध है। उधर, कुमाऊं में शेर नाला और सूर्या नाला में पानी का अधिक प्रवाह होने से हल्द्वानी–चोरगलिया सितारगंज राज्य मार्ग बाधित हो गया है। सड़कों से मलबा हटाने के लिए मशीनरी काम कर रही है, लेकिन लगातार हो रही बरसात से यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के चलते पर्वतीय ढलानों में दरारें बढ़ रही हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। वहीं नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से निचले इलाकों के लोग भी दहशत में हैं।
अभी जारी रहेगी भारी वर्षा
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में प्रशासन अलर्ट मोड पर है और राहत–बचाव टीमें तैनात की गई हैं। इसके बावजूद जनता को अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के पास जाने से परहेज करें।



