
देहरादून, 2 अक्टूबर 2025ः राजस्थान में खांसी की दवा (डेक्सट्रोमेथारफन हाइड्रोब्रोमाइड) पीने से एक बच्चे की मौत और कई बच्चों के बीमार होने के बाद उत्तराखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने लोगों से अपील की है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी की कोई भी दवा न लें।
अपर आयुक्त एवं औषधि नियंत्रक ताजबर सिंह ने बताया कि बच्चों और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए पूरे प्रदेश में खांसी की दवाओं की सैंपलिंग अभियान शुरू कर दिया गया है। सबसे पहले सरकारी अस्पतालों और फार्मेसी से नमूने लिए जाएंगे, इसके बाद बाजार में उपलब्ध दवाओं की भी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी दवा को असुरक्षित पाया गया तो संबंधित कंपनी और विक्रेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
- बच्चों को खांसी या सर्दी-जुकाम होने पर खुद से दवा न दें, केवल डॉक्टर की सलाह मानें।
- बाजार से दवा खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग जरूर देखें।
- यदि दवा खाने के बाद बच्चे में कोई असामान्य लक्षण (उल्टी, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक नींद आदि) दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- दवा हमेशा मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही खरीदें।
गौरतलब है कि राजस्थान के सीकर जिले में खांसी की दवा (डेक्सट्रोमेथारफन हाइड्रोब्रोमाइड) पीने से पांच वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आए हैं। इसी के बाद उत्तराखंड में यह एहतियाती कदम उठाया गया है।



