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देशभक्ति के रंग में रंगा नीती घाटी का सीमांत गांव गमशाली, लोकपर्व के रूप में उल्लास के साथ मना आजादी का उत्सव

Gamshali, a border village in the Niti Valley, was painted in patriotic colours and celebrated Independence Day with gaiety as a folk festival.

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देशभक्ति के रंग में रंगा नीती घाटी का सीमांत गांव गमशाली, लोकपर्व के रूप में उल्लास के साथ मना आजादी का उत्सव

स्वतंत्रता दिवस पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने सीमांत नागरिकों और सेना के जवानों को किया नमन, नीती घाटी के गमशाली क्षेत्र के हर गांव में स्वतंत्रता दिवस पर घर-घर बनाए जाते हैं पारंपरिक व्यंजन, ठीक उसी अंदाज में मनाया जाता है उत्सव, जैसा आजादी मिलने के बाद पहली बार मनाया गया था

देहरादून, 16 अगस्त 2026: चमोली जनपद के चीन सीमा से सटे सीमांत गांव गमशाली में स्वतंत्रता दिवस लोकपर्व के रूप में उल्लास के साथ मनाया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली दौलत सिंह बिष्ट ने ग्रामीणों के साथ प्रतिभाग कर दुंफूधार में ध्वजारोहण किया और सीमांत क्षेत्र में विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच गांवों को आबाद रखने वाले लोगों के साथ ही सीमाओं की रक्षा में तैनात वीर जवानों को नमन किया। इस दौरान देशभक्ति के गीतों से पूरा क्षेत्र आजादी के रंग में रंगा नजर आया।

मुख्य आयोजन गमशाली गांव की दुंफूधार में हुआ। नीती घाटी में स्वतंत्रता दिवस का जश्न लोक उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है, जो अपने-आप में देश प्रेम की अनूठी मिसाल है। इस मौके पर नीती घाटी के गमशाली समेत नीती, गमसाली, बाम्पा, फरख्या, मेहरगांव व कैलाशपुर ग्राम पंचायत के हर में घर-घर पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिससे लोकरंग की अनूठी छटा बिखर उठती है। प्रत्येक गांव से लोग पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर दुंफूधार तक भव्य झांकी के साथ प्रभातफेरी निकालते हैं। यह उत्सव ठीक उसी अंदाज में मनाया जाता है, जैसा आजादी मिलने के बाद पहली बार मनाया गया था।

समारोह को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने कहा कि सीमांत गांवों की मजबूती ही सशक्त भारत की नींव है। सेना और सीमांत नागरिकों का त्याग एवं समर्पण देश की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने गमशाली समेत सभी सीमांत गांवों के नागरिकों और देश की रक्षा में जुटे जवानों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।

15 दिन पहले से होने लगती हैं तैयारियां

लगभग 11 हजार की आबादी वाली जनजातीय बहुल नीती घाटी में स्वतंत्रता दिवस मनाने प्रवासी भी बड़ी ताताद में छुट्टी लेकर गांव पहुंचते हैं। उत्सव की तैयारियों 15 दिन पहले से होने लगती हैं। 15 अगस्त 1947 को दिल्ली में लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराए जाने की जानकारी सीमांत गांवों के लोगों को एक दिन बाद मिली थी। उस दिन लोगों ने अपने घरों में दीप जलाए और फिर पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर गमशाली के दुंफूधार में एकत्र हो स्वतंत्रता की खुशियां मनाईं। तब से यह सिलसिला अनवरत चला आ रहा है।

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