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‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का लोकार्पण, डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने लिखी है यह पुस्तक

Launch of 'Lata Mangeshkar, the Ganga of Singing', a book written by Dr. Indrajit Singh

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‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का लोकार्पण, डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने लिखी है यह पुस्तक

देहरादून, 13 मई, 2026: शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. इन्द्रजीत सिंह की लिखी पुस्तक ‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का मंगलवार को दून पुस्तकालय एव शोध केंद्र के सभागार में भव्य लोकार्पण हुआ। पुस्तक में लेखक ने सशक्त भावों और  अंतश्चेतना के समन्वय से लताजी के ब्रह्ममय अनाहत नाद-निनाद को शब्दों में साकार कर साहित्य  संगीत रसिकों के लिए शोधपरक स्मरण पाथेय का अनुपम उपहार दिया है।

पुस्तक का लोकार्पण मुख्य अतिथि अनिल रतूड़ी (पूर्व डीजीपी), कार्यक्रम अध्यक्ष गीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व कुलपति डॉ सुधारानी पांडेय, डॉ सुशील उपाध्याय, केवि रायवाला की प्राचार्य रीता इन्द्रजीत सिंह व डॉ सुरजीत सिंह (अध्यक्ष, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण) ने किया। मुख्य अतिथि रतूड़ी ने कहा कि इन्द्रजीत सिंह ने जिस विषय पर यह पुस्तक लिखी है, वह जहां प्रथम दृष्टि में आसान-सा कार्य प्रतीत होता है, जबकि उस पर लिखना सच में एक चुनौती पूर्ण कार्य है। दरअसल गीत-संगीत एक  उत्पाद है, लेकिन उसकी निर्माण क्रियात्मक प्रक्रिया एक अलग और  महत्वपूर्ण बात है। यह पुस्तक निश्चित ही शानदार कृति के रूप में आई है, जो लता के व्यक्तित्व, उनके गीत-संगीत और कला यात्रा को बखूबी चित्रित करती है।

पूर्व कुलपति सुधारानी पांडेय ने कहा कि भारत रत्न सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और उनके कालजयी व्यक्तित्व को समर्पित यह पुस्तक डॉक्टर  इंद्रजीत सिंह द्वारा प्रस्तुत भारतीय चित्रपट संगीत क्षेत्र  का महत्वपूर्ण अवदान है। पुस्तक के लेखक इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि गायिकी की गंगा लता मंगेशकर के अद्भुत अप्रतिम गायन से शब्दों की कलियां फूल बनकर दसों दिशाओं में महकती हैं l उनकी मधुर आवाज़ के साथ साज़ जादुई जुगलबंदी करते हैं l उनके गायन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह गीत या ग़ज़ल के शब्दों, उसके अर्थ और भावों को आत्मसात करके शुद्धता और परिपूर्णता के साथ अद्भुत एवं अप्रतिम ढंग से अभिव्यक्त करती हैं।

अध्यक्षता करते हुए गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि लता मंगेशकर मां सरस्वती की वीणा है, जिसकी झंकार प्रत्येक सुरीले व्यक्ति के हृदय में गूंज रही है। वे अपने होठों से जिन शब्दों को छू देती थीं, वह खिलकर ब्रह्मकमल हो जाते थे। संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया। इससे पूर्व, दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने अतिथियों व उपस्थित लोगों का स्वागत किया। कार्यक्रम में गायक एलेग्जेंडर, पीयूष निगम, मनीषा आले और किटी ने लता के गीत यथा- सत्यम शिवम् सुंदरम्, अनपढ़, क्रांति, मधुमती आदि फ़िल्मों के गीतों को प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी, कथाकार जितेन ठाकुर, कर्नल अमरदीप सिंह, डॉली डबराल, डॉ लालिमा वर्मा, वीके डोभाल, हरिहर यादव, सीमा शफक, सुंदर सिंह बिष्ट, शिवमोहन सिंह, प्रतीक पंवार, हरि ओम, प्रवीन भट्ट, शैलेन्द्र नौटियाल, नवीन उपाध्याय, जगदीश बाबला, कल्याण बुटोला, मनोज इष्टवाल, हरिचंद निमेष, डॉ. विद्या सिंह, द्विजेन बहुगुणा, कुसुम भट्ट व देवेन्द्र काण्डपाल सहित कई लेखक, साहित्यकार, संगीत प्रेमी व युवा पाठक मौजूद रहे।

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