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ओडिशा और उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत एक जैसी

Odisha and Uttarakhand share a common spiritual heritage

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ओडिशा और उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत एक जैसी

 

– उत्तराखंड से आए मीडिया के 15 सदस्यीय अध्ययन दल से मुलाकात में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. कंभमपति ने कही यह बात

– लोकभवन भुवनेश्वर में ओडिशा और उत्तराखंड के बीच विकास, संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता पर हुआ सार्थक विमर्श

भुवनेश्वर, 24 मार्च 2026:  राजधानी भुवनेश्वर में संवाद और राष्ट्रीय एकता की परंपरा का एक सजीव उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब उत्तराखंड से आये मीडिया के 15 सदस्यीय अध्ययन दल ने मंगलवार को लोक भवन में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राज्यपाल के साथ सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों के बीच विचार, अनुभव और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से पीआईबी  देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुन्द्रियाल के नेतृत्व में भुवनेश्वर पहुंचे मीडिया दल ने उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान पर प्रकाश डाला। कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अपने प्रमुख तीर्थ स्थलों, पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। ओडिशा और उत्तराखंड के बीच आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन की दृष्टि से कई समानताएं हैं। पुरी का जगन्नाथ मंदिर और उत्तराखंड का केदारनाथ मंदिर भारतीय आस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो देश की आध्यात्मिक एकता को दर्शाते हैं।

उत्तराखंड से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए डॉ. कंभमपति ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012–13 के दौरान राज्य का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के विकास मॉडल को निकट से देखा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में उत्तराखंड के लिए घोषित औद्योगिक पैकेज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे रुद्रपुर जैसे क्षेत्रों में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित हुए। उन्होंने देश में तीव्र गति से हो रहे अवसंरचनात्मक विकास की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के योगदान का विशेष उल्लेख किया। इस संदर्भ में उन्होंने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यटन, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।

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साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

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