उत्तराखंडखगोल-भूगोलजागरूकतापर्यटनप्रेरणायूथवैज्ञानिक खोज
गैरसैंण में ग्रामीण विज्ञान शिक्षकों ने लिया खगोल प्रशिक्षण
Rural science teachers took astronomy training in Gairsain

खबर को सुनें
गैरसैंण में ग्रामीण विज्ञान शिक्षकों ने लिया खगोल प्रशिक्षण
राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण में आयोजित हुई ‘Stars Over Hills : ग्रामीण विज्ञान शिक्षकों हेतु खगोल प्रशिक्षण’ विषय पर कार्यशाला, उत्तराखंड के दूरस्थ एवं दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से आए 30 विज्ञान शिक्षकों ने किया प्रतिभाग
चमोली), 22 दिसंबर 2025 : डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नैचुरल साइंसेज (DIBNS), देहरादून व आर्यभट्ट प्रेक्षणीय विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES), नैनीताल की ओर से राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण में पहली बार तीन दिवसीय खगोल विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ (IAU) ऑफिस ऑफ एस्ट्रोनॉमी फॉर एजुकेशन (OAE) के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘Stars Over Hills: ग्रामीण विज्ञान शिक्षकों हेतु खगोल प्रशिक्षण’ रखा गया था। कार्यशाला का उद्देश्य था ग्रामीण विद्यालयों में खगोल विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करना, शिक्षकों को प्रयोगात्मक एवं अनुभवात्मक शिक्षण विधियों से सशक्त बनाना और छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना। इसमें उत्तराखंड के दूरस्थ एवं दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से आए 30 विज्ञान शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 व राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला के दौरान सौर कलंक अवलोकन, चंद्रमा की कलाएं, ऋतुओं का खगोल वैज्ञानिक कारण, ग्रहण, तारामंडल पहचान, दूरबीन व ऑप्टिक्स जैसे विषयों पर विशेषज्ञों की ओर से व्याख्यान व व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। रात्रिकालीन सत्रों में प्रतिभागियों को तारे, ग्रह व गहन आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन भी कराया गया। कार्यशाला में डॉ. वीरेंद्र यादव (वैज्ञानिक, ARIES, नैनीताल), डॉ. आशीष रतूड़ी (एसोसिएट प्रोफेसर, डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट), डॉ. नितेश कुमार (असिस्टेंट प्रोफेसर, UPES, देहरादून), मोहित पंवार (शोधार्थी, ARIES, नैनीताल) और अभिषेक नेगी (शोधार्थी, डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट) ने संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यशाला में डॉ. वीरेंद्र यादव ने ग्रामीण व पर्वतीय विद्यालयों में खगोल विज्ञान शिक्षा की आवश्यकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि खगोल विज्ञान छात्रों में जिज्ञासा, तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है। कहा कि दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्वच्छ आकाश और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण खगोल विज्ञान शिक्षण के लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला प्रदान करते हैं, जिसका लाभ शिक्षक व छात्रों को अवश्य उठाना चाहिए।

समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राजकीय इंटर कॉलेज, गैरसैंण के प्रधानाचार्य ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्वतीय क्षेत्रों में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा प्रदान करते हैं और शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमता को सुदृढ़ बनाते हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी शिक्षकों से फीडबैक लिया गया और सभी को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। स्थानीय समन्वयक खीम सिंह कंडारी ने सभी सहयोगी संस्थानों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।





