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छह माह के लिए समाधिस्थ हुए हिमालय में विराजमान चतुर्थ केदार

The Fourth Kedar, residing in the Himalayas, has entered a state of *samadhi* (meditative absorption) for six months.

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छह माह के लिए समाधिस्थ हुए हिमालय में विराजमान चतुर्थ केदार

शनिवार शाम 7:47 बजे शीतकाल के लिए बंद किए गए रुद्रनाथ धाम के कपाट, रविवार सुबह धाम से शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर के लिए रवाना होगी बाबा की उत्सव डोली

देहरादून, 17 अक्टूबर 2026: चमोली जिले में समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार बाबा रुद्रनाथ के कपाट शनिवार शाम 7:47 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अब बाबा छह माह समाधि में रहेंगे और इस अवधि में उनकी पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में होगी। बाबा की उत्सव डोली यात्रा रविवार सुबह धाम से गोपेश्वर के लिए प्रस्थान करेगी।

कपाट बंद करने के उत्सव को यादगार बनाने के लिए धाम में 1,000 से अधिक श्रद्धालु व हक-हकूकधारी मौजूद रहे। इससे पहले पुजारी व हक-हकूकधारी बुग्याली क्षेत्र से बुके (बुकले) के फूल लेकर धाम पहुंचे। कपाट बंद करने की प्रक्रिया शाम पांच बजे शुरू हुई। कार्तिक सक्रांति पर सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के साथ मुख्य पुजारी पं. हरीश भट्ट ने बाबा रुद्रनाथ को अन्नकूट का भोग लगाया। फिर बुके के फूलों से भगवान का शृंगार कर उन्हें शीतकाल के लिए समाधि दी गई। इस अवसर पर मनोज नेगी, पंकज नेगी, राम सिंह राणा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

बाबा की उत्सव डोली यात्रा सुबह धाम से गोपेश्वर के लिए प्रस्थान करेगी और रात्रि विश्राम के लिए ग्वाड़ देवलधार पहुंचेगी। 19 अक्टूबर को डोली यहां से गोपीनाथ मंदिर में पहुंचेगी। इसके बाद अगले छह माह बाबा यहीं अपने भक्तों को दर्शन देंगे। रुद्रनाथ धाम में भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं। यहां बाबा प्राकृतिक गुफा में विराजमान में हैं। श्रद्धालुओं को यहां पहुंचने के लिए 19 किमी की कठिन चढ़ाई तय करनी पड़ती है।

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