जिंदा को कागजों में मृत दिखाकर जमीन हड़पने का आरोप
दून ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के निदेशक संजय चौधरी, उनकी मां ओमवती समेत तीन पर मुकदमा, फर्जी वसीयत और श्मशान घाट की रसीद बनाने का आरोप

देहरादून, 8 अक्टूबर 2026। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में जमीन हड़पने के लिए एक जीवित व्यक्ति को दस्तावेजों में मृत दिखाने का आरोप लगा है। शिकायत के मुताबिक दून ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के निदेशक डॉ. संजय चौधरी, उनकी मां ओमवती और एक अन्य महिला चंद्रावती ने कथित आपराधिक षड्यंत्र के तहत जाली वसीयत, फर्जी श्मशान घाट की रसीद और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर ताराचंद की जमीन अपने पक्ष में कराने का आरोप है।
मामले में सिमलासग्रांट, थाना डोईवाला निवासी श्यामलाल पुत्र स्वर्गीय ताराचंद ने न्यायालय में तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 216/2026 दर्ज किया है। आरोपितों में चंद्रावती पत्नी बलवीर सिंह उर्फ भोला निवासी ठाकुरपुर, प्रेमनगर, डॉ. संजय कुमार चौधरी और उनकी मां ओमवती शामिल हैं। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायत के अनुसार आरोपितों ने कथित षड्यंत्र के तहत तीन अगस्त 1995 को ताराचंद की जाली और कूटरचित वसीयत तैयार की। इसके बाद कथित फर्जी श्मशान घाट की रसीद तैयार की गई, जिसमें ताराचंद की मृत्यु 14 जून 2002 दर्शाई गई। आरोप है कि इसी आधार पर उनकी जमीन को अपने पक्ष में कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मामला मौजा ईस्ट हॉप टाउन, परगना पछवादून, जिला देहरादून की जमीन से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक भूमि खाता संख्या 02040 में दर्ज है। इसमें खसरा संख्या 34/8 का 0.1010 हेक्टेयर और खसरा संख्या 121 मि. का 0.3040 हेक्टेयर रकबा शामिल है। दोनों खसरों को मिलाकर कुल जमीन 0.4050 हेक्टेयर है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जाली वसीयत, फर्जी मृत्यु/श्मशान घाट की रसीद और अन्य कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में आरोपितों के पक्ष में धोखाधड़ी से प्रविष्टि दर्ज करा दी गई। इससे ताराचंद के विधिक वारिसों को आर्थिक नुकसान और आरोपितों को अवैध आर्थिक लाभ पहुंचने का आरोप है।
प्रेमनगर थाना पुलिस के अनुसार मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। जांच में कथित वसीयत, श्मशान घाट की रसीद, ताराचंद का वास्तविक मृत्यु प्रमाण पत्र और राजस्व अभिलेख अहम होंगे। इन दस्तावेजों की सत्यता और जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।



