सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण, पिंडदान और पंचबलि भोग के साथ धरती से विदा हुए पितर
On Sarvapitri Amavasya, the ancestors departed from the earth following the rituals of Tarpan, Pind Daan, and Panchabali Bhog.

सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण, पिंडदान और पंचबलि भोग के साथ धरती से विदा हुए पितर
बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ और हरिद्वार स्थित नारायणी शिला में तर्पण-पिंडदान को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, लोगों ने घरों में भी किया पितृ पूजन, गायत्री तीर्थ शांतिकुंज परिसर में चार अलग-अलग स्थानों पर 18 पारियों में आयोजित हुए श्राद्ध संस्कार, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
देहरादून, 10 अक्टूबर 2026: सर्वपितृ अमावस्या पर घरों व तीर्थस्थलों में तर्पण, पिंडदान और पंचबलि भोग के साथ पितरों ने शनिवार को धरा से विदाई ली। इसी के साथ 16 दिनों से चल रहे पितृपक्ष ने भी विराम ले लिया। पितरों के तर्पण व पिंडदान को बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ व हरिद्वार स्थित नारायणी शिला में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग पितृ तर्पण को इन स्थलों पर पहुंचे और पितरों की आत्म शांति एवं मोक्ष की कामना की।
बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ में अलकनंदा नदी के तट पर तीर्थ पुरोहितों व आचार्यों ने विधि-विधान से पितृ कार्य संपन्न कराए। इस मौके पर सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद के रूप में खीर का भोग लगाया। ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष उमानंद उमेश सती, ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष अमित सती, तीर्थ पुरोहित हरीश सती आदि ने पितृकर्म संपन्न कराए। पितृमोक्ष अमावस्या पर हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज परिसर में चार अलग-अलग स्थानों पर 18 पारियों में आयोजित श्राद्ध संस्कारों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वर्चुअल माध्यम से भी जर्मनी, इटली, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, लिथुआनिया सहित कई देशों के श्रद्धालुओं ने श्राद्ध संस्कार संपन्न कराए।
दून में बलभद्र खलंगा विकास समिति की ओर से खलंगा वार मेमोरियल में सामूहिक पितृ तर्पण अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस दौरान दिवंगत सैनिकों की आत्म शांति के लिए प्रार्थना करने के साथ उनके मोक्ष की कामना की गई। वहीं, विश्व जागृति मिशन की ओर से राम कुष्ठ आश्रम व शिव कुष्ठ आश्रम में अन्नदान सेवा कर पितरों का आशीर्वाद लिया गया। इस दौरान दैनिक उपयोग की वस्तुओं के पैकेट वितरित किए गए। लोगों ने घरों में भी ज्ञात-अज्ञात पितरों को विधि-विधान पूर्वक विदाई दी।



