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अब बागेश्वर में गुलदार का शिकार बनी महिला, एक दिन पहले अल्मोड़ा ने बाघ ने मार डाली थी एक महिला

Now a woman has become the victim of leopard in Bageshwar, a day before a tiger had killed a woman in Almora.

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अब बागेश्वर में गुलदार का शिकार बनी महिला, एक दिन पहले अल्मोड़ा ने बाघ ने मार डाली थी एक महिला

मंगलवार को बागेश्वर में मवेशी चराने जंगल गई महिला को गुलदार ने बनाया निवाला, साथ गए पति ने सुनी चीख तो बचाने के लिए दौड़े, लहूलुहान पड़ी मिली पत्नी, मौके से भागता नजर आया गुलदार

देहरादून, 04 अगस्त 2026:  बागेश्वर जिले की कांडा तहसील क्षेत्र में मंगलवार को खड़खेत के जंगल मवेशी चराने गई 48 वर्षीय महिला को गुलदार ने शिकार बना डाला। महिला की चीख-पुकार सुन जब उसके पति मौके पर पहुंचे तो गुलदार भागता नजर आया। महिला के चेहरे पर सिर पर गहरे जख्म थे। पुलिस भी प्रथमदृष्ट्या इसे गुलदार का हमला मान रही है, जबकि वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही अधिकृत रूप से कुछ कहा जा सकेगा। इससे पहले सोमवार को अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लाक में 21 वर्षीय शालू को गुलदार ने निवाला बना लिया था। दो दिन में दो महिलाओं के बाघ-गुलदार का शिकार बनने से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। लोगों ने क्षेत्रवासियों को बाघ-गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।

बागेश्वर के ग्राम बाझीरौट निवासी कमला देवी गांव के 19 परिवारों के 50 से अधिक गाय, बैल और बकरियों को चराने के लिए जंगल गई थीं। कमला के साथ उनके पति पूरन राम भी थे। दोनों एक-दूसरे से कुछ ही फासले पर थे। दोपहर करीब 12 बजे अचानक कमला देवी की चीख सुनाई दी तो पूरन राम और गांव के ही पंकज राम उसकी ओर दौड़ पड़े। मौके पर देखा तो कमला लहूलुहान पड़ी थीं। दोनों को एक गुलदार ढलान की ओर भागते हुए देखा। घटना के बाद कांडा थाना प्रभारी बलवंत कंबोज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद वन विभाग की टीम ने भी घटनास्थल का जायजा लेने पहुंच गई। थाना प्रभारी ने बताया कि घटना गुलदार के हमले की ही प्रतीत हो रही है। जबकि, प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्न  का कहना था कि हमला गुलदार का ही था, इस बारे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

सात माह में 39 लोग बने जंगली जानवरों का शिकार

प्रदेश में इस वर्ष जनवरी से अब तक 39 लोग जंगली जानवरों का निवाला बन चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा मौतें बाघ व गुलदार के हमलों में हुईं। इसके अलावा हाथी, भालू, सुअर व मगरमच्छों ने भी कई लोगों की जान ली। इससे वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि वह बाघ-गुलदार के डर से घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए हैं। यही नहीं, बच्चों को स्कूल भेजना भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है।

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