युद्धाभ्यास में सेना के श्वान कर रहे जांबाजी का प्रदर्शन
Army dogs demonstrating valour during military exercises.
युद्धाभ्यास में सेना के श्वान कर रहे जांबाजी का प्रदर्शन
भारतीय नस्ल के रैम्पुर हाउंड समेत चार प्रशिक्षित श्वान ले रहे हिस्सा, रूम इंटरवेंशन और रस्सी से उतरने के अभ्यास में दिखाया कौशल, उत्तराखंड और राजस्थान में चल रहा भारत-अमेरिका का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास
देहरादून, 20 सितंबर 2026: सेना के प्रशिक्षित श्वान इन दिनाें ‘युद्ध अभ्यास -2026’ के तहत अपने प्रशिक्षण और फुर्ती का प्रदर्शन कर रहे हैं। वह दुश्मन के ठिकानों में दाखिल होने से लेकर संदिग्ध की तलाश और ऊंचाई से रस्सी के सहारे उतरने तक कौशल दिखा रहे हैं। दो सप्ताह का यह युद्धाभ्यास उत्तराखंड और राजस्थान में 15 सितंबर से चल रहा है।
भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास में राइस, विक्टर, जैक और राउडी नाम के चार श्वान हिस्सा ले रहे हैं। इनमें भारतीय नस्ल के रैम्पुर हाउंड विक्टर और राउडी भी शामिल हैं। पेशेवर आदान-प्रदान के तहत श्वानों ने अमेरिकी सैनिकों के सामने रूम इंटरवेंशन और रैपलिंग जैसे अभ्यास किए। कठिन सामरिक परिस्थितियों में अपने हैंडलर के साथ उनका तालमेल और त्वरित
प्रतिक्रिया अभ्यास का खास हिस्सा रही। अमेरिकी सैनिकों ने भी इन प्रशिक्षित श्वानों की कार्यक्षमता और प्रशिक्षण को करीब से देखा। इन श्वानों का परिवार भी सैन्य अभियानों में अपनी भूमिका निभा चुका है। इनके भाई-बहन आपरेशन सिंदूर के दौरान जालंधर और अमृतसर सेक्टर में तैनात रहे थे।
रैम्पुर हाउंड पहले मेघालय के उमरोई में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में अपनी क्षमता प्रदर्शित कर चुके हैं। इसके बाद मणिपुर सीमा पर तैनाती के दौरान उन्होंने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी) का पता लगाने में सफलता हासिल की। विक्टर और राउडी रैम्पुर हाउंड, जैक बेल्जियन मेलिनोइस और राइस लैब्राडोर रिट्रीवर नस्ल के हैं। भारतीय सेना में स्वदेशी नस्लों को सैन्य भूमिकाओं में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर तैनाती का अनुभव रखने वाले ये श्वान निगरानी, तलाशी और विशेष अभियानों में सैनिकों के साथ काम करते हैं। 15 सितंबर से शुरू हुआ युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण दो सप्ताह तक चलेगा। उत्तराखंड के औली फारेन ट्रेनिंग नोड और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ हो रहे अभ्यास में दोनों देशों के 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। पर्वतीय और अर्द्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप के
संचालन और दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ ड्रोन व स्वायत्त प्रणालियों के इस्तेमाल का भी अभ्यास किया जा रहा है।




