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नंदा भक्तों ने हंसते-हंसते पार की ज्यूंरागली की दुर्गम राह, शिलासमुद्र में डाला पड़ाव

The Nanda devotees traversed the arduous path of Jyunragali with cheerful spirits and pitched camp at Shilasamudra.

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नंदा भक्तों ने हंसते-हंसते पार की ज्यूंरागली की दुर्गम राह, शिलासमुद्र में डाला पड़ाव

 

रूपकुंड से ज्यूंरागली पहुंचने पर भावुक हुईं मां नंदा, बंड भूम्याल के प्रति किया स्नेह का प्रदर्शन, नर कंकालों की झील के रूप में प्रसिद्ध रूपकुंड के सौंदर्य पर रीझे नंदा भक्त

देहरादून, 19 सितंबर 2026: बारह साल बाद कैलास के लिए विदा हो रही हिमालय की अधिष्ठात्री देवी नंदा की बड़ी जात पातर नचौणियां से छेड़ी नाग, रूपकुंड, ज्यूंरागली व थाला उलारी की पथरीली राह नापते हुए शनिवार को शिलासमुद्र पहुंच गई। इससे पहले, रूपकुंड से ज्यूंरागली पहुंचने पर मां नंदा भावुक हो गईं और उन्होंने बंड भूम्याल के प्रति स्नेह का प्रदर्शन किया। इस भावुक कर देने वाले दृश्य को देख श्रद्धालुओं की आंखों के पोर गीले हो गए।


नंदा पथ की दुर्गम एवं पथरीली राह कदम-कदम पर नंदा भक्तों की परीक्षा ले रही है। लेकिन, नंदा भक्त इस राह पर हंसते-हंसते ऐसे आगे बढ़ रहे हैं, जैसे इस सबसे बेखबर हों। रूपकु़ंड के सौंदर्य ने तो उन्हें सम्मोहित-सा कर दिया। रूपकुंड को नर कंकालों की झील कहा जाता है। इस झील में सदियों पुराने नर कंकाल बिखरे पड़े हैं। इन्हें नंदा देवी बड़ी जात के इतिहास से जोड़कर देखा जाता है।

ज्यूंरागली से आगे बंड भूम्याल दिखाते हैं राह

 

लोक मान्यता है कि मां नंदा को कैलास जाने के लिए जब ज्यूंरागली से आगे रास्ता नहीं मिल पाता, तब क्षेत्रपाल देवता बंड भूम्याल अपने अस्त्र कटार से आगे की राह बनाते हैं। उन्हीं की अगुआई में नंदा की डोली वहां से ताला उलारी होते हुए शिलासमुद्र पहुंचती है। यहां से आगे होमकुंड तक द्यौसिंह देवता बड़ी जात का मार्गदर्शन करते हैं।

अनूठा है शिला समुद्र

चमोली जिले में समुद्रतल से 14,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक अत्यंत दुर्गम एवं रहस्यमयी पड़ाव शिला समुद्र चारों ओर शिलाओं से घिरा हुआ है। जिधर नजर दौड़ाओ, बड़े-बड़े पत्थरों के सिवा और कुछ नजर नहीं आता। ऐसा प्रतीत होता है, मानो हम शिलाओं के समुद्र में आ गए हैं। बड़ी जात रविवार को शिला समुद्र से होमकुंड पहुंचेगी। यहां विधि-विधान पूर्वक मां नंदा को कैलास के लिए विदाई दी जाएगी। मान्यता के अनुसार चौसिंग्या खाडू कैलास तक उनके साथ जाएगा। जबकि, नंदा के भक्त होमकुंड से जामुनडाली के लिए वापसी करेंगे।

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