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नंदा देवी की बड़ी जात में शामिल नहीं होगी कुरुड़ नंदा राजराजेश्वरी की डोली, पांच सितंबर से ही होगी लोकजात

The palanquin of Kurud Nanda Rajrajeshwari will not be included in the big Nanda Devi Jat; Lok Jat will be held from September 5 only.

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नंदा देवी की बड़ी जात में शामिल नहीं होगी कुरुड़ नंदा राजराजेश्वरी की डोली, पांच सितंबर से ही होगी लोकजात

कुरुड़ मंदिर समिति की बैठक में लिया गया सर्वसम्मति से यह निर्णय, नंदा देवी की वार्षिक लोकजात पर हुई चर्चा, पांच से 25 सितंबर तक होगा यह आयोजन, 21 पड़ावों से होकर गुजरेगी 200 किमी की यह धार्मिक पैदल यात्रा, वेदनी बुग्याल में लेगी विराम

देहरादून, 17 अगस्त 2026: नंदा राजराजेश्वरी सिद्धपीठ कुरुड़ की डोली 12 वर्ष बाद पांच सितंबर से आयोजित होने वाली नंदा देवी बड़ी जात में शामिल नहीं होगी। यह निर्णय सोमवार को कुरुड़ मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। कहा गया कि तय कार्यक्रम के अनुसार परगना बधाण की लोकजात पांच सितंबर को कुरुड़ से शुरू होगी और 21 पड़ावों से होते हुए 25 सितंबर को वेदनी बुग्याल में तर्पण-पूजन के साथ विराम लेगी। 200 किमी की इस धार्मिक यात्रा में सिर्फ दो निर्जन पड़ाव हैं।

बैठक में कहा गया कि नंदा देवी बड़ी जात समिति की ओर से अभी कुरुड़ मंदिर समिति को आयोजन के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है, इसलिए मंदिर समिति बड़ी जात में किसी भी प्रकार की सहभागिता नहीं निभाएगी। कहा गया कि लोकजात दो निर्जन पड़ावों गैरोली पातल व वेदनी बुग्याल से होकर गुजरेगी। लोकजात में सिर्फ नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ की डोली शामिल होगी, जिसकी अगुआई अंतिम गांव वाण से नंदा के धर्म भाई लाटू देवता करेंगे। कहा गया कि नंदा राजराजेश्वरी की डोली नंदकेसरी तब पहुंचती है, जब 12 साल बाद राजा छंतोली और चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) के साथ मां नंदा की मनौती लेकर वहां आते हैं। लेकिन, राजा की ओर से इस वर्ष मलमास पड़ने के कारण राजजात स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। राजजात का आयोजन वर्ष 2027 में होना है, जिसका दिनपट्टा आगामी वसंत पंचमी पर्व पर नौटी में निकाला जाएगा।

पुजारियों ने बताया कि ग्राम पंचायत वाण की ओर से पिछले कई महीनों से अवगत कराया जा रहा हैं कि मां नंदा की डोली नंदा सप्तमी पर्व पर वेदनी कुंड में पूजा के बाद वाण गांव लौटेगी। 12 साल में जब राजजात का आयोजन होता है, तब नंदा राजराजेश्वरी पर ग्राम पंचायत वाण का अधिकार होता है। इस वर्ष लोकजात ही निकाली जाएगी। परंपरा के अनुसार लोकजात का दिनपट्टा हर वर्ष एक माह पहले निकाला जाता है, जो बीते पांच अगस्त को जारी हो चुका है। परंपरा के अनुसार जहां-जहां मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली जाएगी, वहां-वहां पुजारी लोक
परंपरा का निर्वहन करेंगे।

नंदा देवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ कुरुड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में सुनील प्रसाद, रमेश चंद्र, खिमानंद, सूरजमणी, जगदीश प्रसाद, मनोहर प्रसाद, पवनेश, विजय प्रसाद, बच्ची राम, लक्ष्मी प्रसाद, भवानी दत्त, संजय गौड़, दयाराम गौड़, कालिका प्रसाद, कुलानंद, पारेश्वर प्रसाद, नरेश चंद्र, रमेश चंद्र, मंसाराम गौड़, राजेश प्रसाद, धनीराम गौड़ व शंभू प्रसाद समेत बड़ी संख्या में हक-हकूकधारी मौजूद रहे।

गौड़ पुजारियों ने की लाटूधाम में पूजा

गौड़ पुजारियों लाटूधाम वाण में नंदा राजराजेश्वरी की पूजा की। लाटू धाम के अध्यक्ष कृष्णा सिंह बिष्ट ने बताया कि बधाण के 14 सयाणों, पड़ाव व मंदिर समिति के अध्यक्षों, हक-हकूकधारियों व नंदा भक्तों की ओर से देवराड़ा, कुलसारी, वाण, मुंदोली और देवाल में लिए गए निर्णय के अनुसार लोकजात के दिनपट्टा पर मोहर लगा दी गई। इस मौके पर ग्राम प्रधान नंदूली देवी, व्यापार संघ अध्यक्ष हीरा बूगयाली, पड़ाव अध्यक्ष हीरा गढ़वाली, सरपंच महिपत सिंह, युवक मंगल दल अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कृष्णा सिंह,  क्षेत्र पंचायत प्रमुख हेमा देवी आदि मौजूद रहे।

तय दिनपट्टा के अनुसार पांच सितंबर से निकलेगी नंदा की बड़ी जात

श्री नंदा देवी बड़ी जात के आयोजन में बधाण पट्टी के पुजारियों के शामिल न होने के निर्णय पर श्री नंदा देवी बड़ी जात समिति के अध्यक्ष ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि बड़ी जात का आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार पांच से 30 सिंतबर तक ही होगा। श्री नंदा देवी बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत (सेनि) ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ सूचनाओं से पता चला कि कुछ लोगों ने एकतरफा निर्णय लेते हुए बड़ी जात के आयोजन की जगह लोकजात कराने की घोषणा की है। जबकि, इसी वर्ष 23 जनवरी को सिद्धपीठ कुरुड़ में हुई महापंचायत में नंदा देवी बड़ी जात के आयोजन की घोषणा कर दी गई थी। बड़ी जात शुरू होने में अब सिर्फ तीन सप्ताह बचे हैं। ऐसे में बीते 16 अगस्त को बंद कमरे में नंदा देवी परगना बधाण के अध्यक्ष नरेश गौड़ की ओर से लोकजात कराने का एकतरफा निर्णय ले लिया गया। यह अंत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

कर्नल हरेंद्र सिंह रावत (सेनि) ने कहा कि 13 अगस्त 2026 को मंदिर परिसर में हुई खुली बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव परगना बधाण की डोली के अध्यक्ष ने नहीं रखा था। प्रतीत होता है कि उन्होंने वार्षिक लोकजात के आयोजन का निर्णय किसी बाहरी दबाव में लिया। कहा कि यह बड़ी जात का आयोजन धार्मिक परंपरा के अनुसार हो रहा है। इसलिए उचित होगा कि सभी हक-हकूकधारी इस आयोजन में सहयोग करें।

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