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बिना हेलमेट और लाइसेंस के नहीं मिलेगा पेट्रोल

Petrol will not be provided without a helmet and license.

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बिना हेलमेट और लाइसेंस के नहीं मिलेगा पेट्रोल

देहरादून, 7 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड में बढ़ते सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए अब सख्ती बढ़ाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने सोमवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक होटल में अधिकारियों के साथ बैठक कर सड़क सुरक्षा को लेकर कई निर्देश दिए।

न्यायमूर्ति सप्रे ने निर्देश दिए कि बिना हेलमेट और वैध ड्राइविंग लाइसेंस के दोपहिया वाहन चलाने वालों को पेट्रोल न दिया जाए। सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भी बिना हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन बीमा वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने को कहा गया।

उन्होंने सरकारी कर्मचारियों द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन को भी गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। नियमों का पालन नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ उनकी अनुपस्थिति दर्ज करने को कहा गया।

आठ माह में 1480 हादसे, 884 लोगों की मौत

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अगस्त तक प्रदेश में 1480 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 884 लोगों की मौत हुई, जबकि 1626 लोग घायल हुए। सबसे अधिक मौतें ऊधमसिंह नगर में 229, हरिद्वार में 213, देहरादून में 131 और नैनीताल में 104 दर्ज की गईं। समिति अध्यक्ष ने दुर्घटनाओं के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करने और रोकथाम के उपायों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

चारधाम यात्रा मार्ग पर बढ़ेंगे कैमरे

चारधाम यात्रा मार्ग पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए एनपीआर कैमरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए। पर्वतीय मार्गों पर कैमरों के माध्यम से ओवरस्पीडिंग के चालान की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में अधिक जनहानि को देखते हुए वहां भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा गया।

वाहन नंबर से जांचे जाएंगे दस्तावेज

बैठक में वाहन नंबर के आधार पर पंजीकरण, प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) और बीमा की स्थिति जांचने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। नियमों का उल्लंघन मिलने पर स्वचालित चालान की व्यवस्था को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए। समिति ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी और सड़क सुरक्षा के लिए उपलब्ध तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया।

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