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प्रसव पीड़िता को डंडी पर लादकर पहुंचाया अस्पताल, पैदल नापी छह किमी की दूरी, फिर भी नहीं मिला डॉक्टर

A woman in labor was carried to the hospital on a makeshift stretcher—a six-kilometer journey made on foot—yet no doctor was available.

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प्रसव पीड़िता को डंडी पर लादकर पहुंचाया अस्पताल, पैदल नापी छह किमी की दूरी, फिर भी नहीं मिला डॉक्टर

चमोली जनपद के देवाल ब्लॉक का दूरस्थ गांव पिनाऊं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल में नहीं मिला डॉक्टर, मजबूरी में ले जाना पड़ा जिला अस्पताल बागेश्वर, पिनाऊं के लिए स्वीकृत है मोटर मार्ग, लेकिन आज तक नहीं हो पाया उसका निर्माण

देहरादून, 03 सितंबर 2026: पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली लोगों की जान पर किस तरह भारी पड़ रही है, इसकी बानगी बुधवार को देवाल ब्लाक के दूरस्थ गांव पिनाऊं में देखने को मिली। गांव से एक प्रसव पीड़िता को डंडी पर अस्पताल ले जाने के लिए लोगों को रोड हेड पाटीगधार तक छह किमी की दूरी पैदल नापनी पड़ी। इसके बाद वह टैक्सी बुक कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचे तो वहां डॉक्टर नहीं मिला। ऐसे में उन्हें यहां से बागेश्वर स्थित जिला अस्पताल की राह पकड़नी पड़ी।

जानकारी के अनुसार पिनाऊं निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता खिमिली देवी को बुधवार दोपहर बाद प्रसव पीड़ा होने लगी। यह गांव सड़क से नहीं जुड़ा है, इसलिए ग्रामीणों ने पहले उसे छह किमी की दूरी पैदल नापकर डंडी से पाटीगधार पहुंचाया और फिर प्राइवेट वाहन से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल ले गए। तब तक रात के नौ बज चुके थे और विडंबना देखिए के अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं था। ऐसे में प्रसव पीड़िता को एंबुलेंस से जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाना पड़ा। तब जाकर उसे उपचार मिल पाया। गनीमत रही कि वर्षा के चलते मार्ग अवरुद्ध नहीं था, अन्यथा महिला को अस्पताल ले जाना चुनौती बन जाता।

ग्राम प्रधान लखपत सिंह व पूर्व प्रधान गंगा सिंह ने बताया कि पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू का यह गांव आज भी मोटर मार्ग से वंचित है। गांव के लिए धुराधारकोट से वाक होते हुए 21 किमी मोटर मार्ग स्वीकृति तो है, लेकिन उसका निर्माण आज तक नहीं हो पाया। बताया कि बलाण होते हुए भी पिनाऊं को मोटर मार्ग से जोड़ा जा सकता है, लेकिन इस ओर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। जबकि, बलाण से पिनाऊ की दूरी मात्र छह किमी है।

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