
डिजिटल हुए कुमाऊंनी लोकगीतों के छह दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स, दून लाइब्रेरी नव निभाई इसमें अहम भूमिका
1930 के दशक के आखिर या 1940 के दशक की शुरुआत में बने थे ये ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स, देहरादून में ब्रिगेडियर राजेंद्र रावत के कलेक्शन में थे ये रिकॉर्ड्स, दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के संग्रहालय की बनेंगे शोभा
देहरादून, 06 अगस्त, 2026 : एक खास प्रोजेक्ट के तहत दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र ने गुरुवार को देहरादून में कुमाऊंनी लोकगीतों के छह दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स को डिजिटल कर दिया। ये ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स 1930 के दशक के आखिर या 1940 के दशक की शुरुआत में बने थे और इनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। ये रिकॉर्ड्स देहरादून में ब्रिगेडियर राजेंद्र रावत के कलेक्शन में मिले थे और इनके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए दून लाइब्रेरी ने इन्हें डिजिटल करने का निर्णय लिया।
रिकॉर्ड्स को डिजिटल करने में मदद के लिए रिस्की पाठक हल्द्वानी से आए थे। इन रिकॉर्ड्स में मास्टर शेर सिंह, चंदा बाई, राम देई, इंदिरा बाई आदि के गाए कुमाऊंनी गीत शामिल थे। गुरुवार को कुल 12 गीतों को डिजिटल किया गया। अब ये गीत दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के संग्रहालय में रहेंगे। इससे पहले दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के कलेक्शन में पहाड़ी लोक संगीत के ऐसे चार दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स थे, अब इस कलेक्शन में 10 रिकॉर्ड्स के डिजिटल गीत शामिल हो गए हैं। विदित हो कि गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार के ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स के इतिहास के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। लाइब्रेरी ने 1930 से 1970 के दशक के बीच बने ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स की एक संभावित सूची भी तैयार की है।

एक अनुमान के मुताबिक गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार के 15 ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स हैं। यह गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार के ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स की एक संभावित सूची है। आज़ादी से पहले बने ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी। दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर को जुगल किशोर पेटशाली के कलेक्शन से चार ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स मिले थे। गुरुवार को दून लाइब्रेरी में पुराने और दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग्स का डिजिटलीकरण पूरा हुआ। पहाड़ी राज्य की रिकॉर्डिंग्स की संभावित सूची इस प्रकार है:
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मास्टर शेर सिंह, एयरो-फोन रिकॉर्ड्स (1929)
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गोपी देवी, पहाड़ी (कुमाऊं की पहाड़ियां), GE. 18049, कोलंबिया, 10″,
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गोपी देवी, हिंदुस्तानी, GE. 5337, कोलंबिया,
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गोपी देवी, पहाड़ी, GE. 5349, कोलंबिया,
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चंपा देवी, पहाड़ी, GE 5285, कोलंबिया,
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भीमताल की चंदा बाई, NZ. 1108, एयरो-फ़ोन
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मास्टर शेर सिंह, इंदिरा बाई और राम देई, NZ. 1145, एयरो-फ़ोन
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इंदिरा बाई और मास्टर शेर सिंह, NZ. 1146, एयरो-फ़ोन
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चंपा देवी, GE 5####, कोलंबिया
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चंपा देवी, GE 5342, कोलंबिया
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जीत सिंह नेगी, गढ़वाली, कोलंबिया (1949)
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मोहन उप्रेती, कुमाऊंनी, HMV (1950 के दशक में)
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असम, उत्तर प्रदेश और अंडमान के गाने, फोकवेज़ (1960)
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भारतीय लोक नृत्य, कुमाऊंनी नृत्य, HMV (1963)
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गोपाल बाबू गोस्वामी, कुमाऊंनी, पॉलीडोर, (1979)
कई नई जानकारियां:
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मास्टर शेर सिंह कुमाऊं के एक जाने-माने लोक गायक थे। अब तक उनके तीन रिकॉर्ड्स के बारे में जानकारी मिली है। मास्टर शेर सिंह के तीन गाने अब लाइब्रेरी के पास हैं।
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महिला कलाकारों में गोपी देवी और चंदा देवी के नाम तीन-तीन ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड दर्ज हैं। महिला लोक कलाकारों में यह संख्या सबसे ज़्यादा है।
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भीमताल की चंदा बाई एक अपेक्षाकृत नया नाम है जिसके बारे में किसी ने नहीं सुना है। उनके लेबल पर उनके मूल स्थान भीमताल का ज़िक्र है।
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इंदिरा बाई दो रिकॉर्ड्स में शामिल रही हैं।
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एक और अनसुना नाम, राम देई, मास्टर शेर सिंह और इंदिरा बाई के साथ एक समूह गीत में शामिल रही हैं।
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एयरो-फ़ोन रिकॉर्ड्स उज्जैन और दिल्ली में बनाए गए थे।
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साक्षरता पर नरेंद्र नेगी की दुर्लभ ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी डिजिटल किया गया




