अंतरराष्ट्रीयअध्यात्मउत्तराखंडऊर्जातीर्थाटनधर्म-परम्पराएंप्रेरणाराष्ट्रीयसंस्कृति

बदरीनाथ धाम से अपने जन्मस्थल लीलाढूंगी पहुंचे भगवान नर-नारायण, भक्तों को दिए दर्शन

Lord Nar-Narayan reached his birthplace Liladhungi from Badrinath Dham and gave darshan to the devotees.

खबर को सुनें


बदरीनाथ धाम से अपने जन्मस्थल लीलाढूंगी पहुंचे भगवान नर-नारायण, भक्तों को दिए दर्शन

बदरीनाथ धाम में चल रहे भगवान नर-नारायण जन्मोत्सव के दूसरे दिन भगवान के उत्सव विग्रह ने नगर भ्रमण किया और बामणी गांव स्थित नंदा मंदिर पहुंचकर अपने भक्तों को आशाीर्वाद दिया

देहरादून, 17 अगस्त 2026:  बदरीनाथ धाम में चल रहे नर-नारायण जन्मोत्सव के दूसरे दिन श्रावण शुक्ल पंचमी को भगवान नर-नारायण देव डोली में विराजमान होकर अपने जन्म स्थल लीलाढूंगी और फिर बामणी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने उनका धूमधाम से अभिषेक किया। नंदा देवी मंदिर में गांव के महिला मंगल दल ने पारंपरिक जागरों से भगवान नर-नारायण का स्वागत किया।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि श्रावण मास के अंतिम सोमवार को बदरीनाथ धाम स्थित आदि केदारेश्वर मंदिर में  मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी ने पके चावल का भोग भगवान शिव को अर्पित कर अन्नकूट पूजा संपन्न की और सबकी सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर धर्माधिकारी पं. स्वयंवर सेमवाल समेत वेदपाठी व आचार्यगणों ने पूजा-अर्चना में सहभागिता की।

वहीं, लीलाढूंगी में नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी  रवीन्द्र भट्ट व वाणी विलास डिमरी ने विधि-विधान से अभिषेक पूजा संपन्न की। इस अवसर पर पंडित मोहित सती, प्रभारी अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण,  जगमोहन बर्त्वाल, लेखाकार भूपेंद्र रावत, अजय सती, राकेश झिंक्वाण, विकास सनवाल, दफेदार हरेंद्र कोठारी, तीर्थ पुरोहित और बड़ी संख्या में  बामणी  व माणा गांव के  श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button