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धराली आपदा के दौरान मलबे में दब गया था कल्पकेदार, शुरू हुआ मंदिर को बाहर निकालने का कार्य

Kalpkedar was buried under debris during the Dharali disaster; work to unearth the temple has begun.

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धराली आपदा के दौरान मलबे में दब गया था कल्पकेदार, शुरू हुआ मंदिर को बाहर निकालने का कार्य

वर्ष 2025 की धराली आपदा के दौरान मलबे में दब गया था यह प्राचीन मंदिर, शारदीय नवरात्र के पहले दिन पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुआ खुदाई का कार्य, इस पर प्रतिदिन खर्च होंगे 40 हजार रुपये

देहरादून, 12 अक्टूबर 2025: पांच अगस्त 2025 को धराली में आई विनाशकारी आपदा प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को भी लील गई थी। यह मंदिर तब खीर गंगा के
मलबे में दब गया था, जिसे एक साल बाद बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों ने मलबा हटाना शुरू कर दिया है। रविवार को शारदीय नवरात्र के पहले दिन मंदिर समिति
और ग्रामीणों ने सोमेश्वर देवता की डोली की मौजूदगी में भूमि पूजन कर एक्सकेवेटर मशीन (पोकलेन) की मदद से मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए खुदाई शुरू की।

खीर गंगा नदी में आए सैलाब ने धराली कस्बे का अस्तित्व ही मिटा डाला था। इस दौरान प्राचीन कल्पकेदार मंदिर का ऊपरी गुंबद ध्वस्त हो गया था, जबकि मंदिर गर्भगृह व परिसर मलबे में दब गया था। बीते पांच अगस्त को आपदा की बरसी पर ग्रामीणों ने क्षेत्र के आराध्य देवता सोमेश्वर से मंदिर की खुदाई की अनुमति मांगी थी। ग्रामीणों के अनुसार, देवता ने नवरात्र से खुदाई शुरू करने की अनुमति दी थी। प्राचीन कल्पकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार और सचिव संजय पंवार ने बताया कि कल्पकेदार मंदिर धराली की पहचान रहा है। यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता था।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने भी पूर्व में मंदिर को मलबे से बाहर निकालने का भरोसा दिलाया था, लेकिन बात फिर आई-गई हो गई। लिहाजा, ग्रामीणों ने खुद पहल करते हुए खुदाई शुरू कराई है। इस मौके पर मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष विपेंद्र पंवार, ग्राम प्रधान अजय नेगी, सुशील पंवार, जय भगवान सिंह पंवार, महेश पंवार, दुर्गेश पंवार, सचेंद्र पंवार, शैलेंद्र सिंह पंवार, युवक मंगल दल अध्यक्ष शुभम पंवार सहित महिला मंगल दल और कीर्तन मंडली के सदस्य मौजूद रहे।

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