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गंगा पर तीन धारा शिवमूर्ति के पास बनकर तैयार हुआ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का महत्वपूर्ण पुल

An important bridge of the Rishikesh-Karnprayag rail project has been completed near Teen Dhara Shivmurti on the Ganga.

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गंगा पर तीन धारा शिवमूर्ति के पास बनकर तैयार हुआ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का महत्वपूर्ण पुल

टिहरी से पौड़ी जिले को जोड़ेगा गंगा पर बना यह 125 मीटर मुख्य स्पान का एकमात्र रेल पुल, गंगा की सहायक नदियों पर हैं परियोजना के बाकी पुल

देहरादून, 10 अगस्त 2026: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने गंगा नदी पर 125 मीटर स्पान का पुल तैयार कर लिया है। अब इसे अंतिम स्वरूप दिया जा रहा है।  रेल परियोजना के तहत गंगा पर बना यह एकमात्र पुल है, जो टिहरी से पौड़ी जिले से जोड़ेगा। गढ़वाल मंडल के पर्वतीय जिलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ ही सामारिक दृष्टि से भी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना बेहद अहम है। परियोजना में 13 स्टेशन हैं, जिनमें वीरभद्र और योगनगरी रेल स्टेशन बनकर तैयार हो गए हैं और इनसे गाड़ियों का संचालन भी हो रहा है। नौ मई से परियोजना पर लाइन बिछाने की काम भी शुरू कर दिया है।

आरवीएनएल के उप महाप्रबधंक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि परियोजना में 19 प्रमुख पुल हैं, जिसमें आठ पर काम पूरा हो गया है। अब आरवीएनएल ने तीन धारा शिवमूर्ति के पास गंगा नदी पर भी 125 मीटर मुख्य और 32 मीटर सहायक स्पान का पुल तैयार कर लिया है। परियोजना में गंगा पर बना यह एकमात्र पुल है। बाकी पुल गंगा की सहायक नदियों पर हैं। रेल पुल के साथ ही स्टेशनों तक पहुंच के लिए रोड पुल का काम भी तेज किया जा रहा है।

परियोजना का हिस्सा हैं गढ़वाल के पांच जिले

रेल परियोजना गढ़वाल क्षेत्र को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं हर मौसम में रेल संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। इससे बार-बार भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कमजोर सड़क नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी। परियोजना में पांच जिले देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग व चमोली शामिल हैं।

ऋषिकेश से ढाई घंटे में कर्णप्रयाग पहुंच जाएंगे मुसाफिर

125 किमी लंबी इस परियोजना में लगभग 104 किमी (83 प्रतिशत) लंबाई सुरंगों की है। इनमें 16 मुख्य सुरंग, 12 निकास सुरंग, गहरी घाटियों व नदियों पर बने 19 प्रमुख और 31 छोटे पुल शामिल हैं। परियोजना का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कर्णप्रयाग है। यहां 26 लाइन बिछाई जाएंगी। इसे टर्मिनस के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच का सफर छह घंटे से घटकर लगभग 2.5 घंटे रह जाएगा।

जून 2028 तक ऋषिकेश से व्यासी के बीच दौड़ने लगेगी रेल

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच रेल दो चरण में पहुंचेगी। योगनगरी ऋषिकेश से व्यासी तक जून 2028 में रेल संचालन की योजना है। इन स्टेशनों के बीच की दूरी 27.69 किमी है। व्यासी से कर्णप्रयाग के बीच दिसंबर 2029 तक रेल संचालन का लक्ष्य रखा गया है। इन स्टेशनों के बीच की दूरी 92.60 किमी है। परियोजना की अनुमानित लागत 37 हजार करोड़ रुपये है।

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