उत्तराखंडपर्यटनयूथराष्ट्रीय

वन विभाग ने रणकधार से लौटाए रूपकुंट ट्रेक पर जा रहे पर्यटक

The Forest Department turned back tourists heading to the Roopkund trek from Ranakdhar.

खबर को सुनें


वन विभाग ने रणकधार से लौटाए रूपकुंट ट्रेक पर जा रहे पर्यटक

पर्यटकों ने वन विभाग पर लगाया ट्रेकिंग पर जाने से पहले जानकारी न देने का आरोप, 12 सितंबर को वाण से ट्रेकिंग पर निकला था 21 सदस्यीय पर्यटक दल

देहरादून, 14 सितंबर 2026: चमोली जिले के देवाल विकासखंड में पर्यटकों को अधूरी जानकारी देकर रूपकुंड ट्रेक पर भेजने का मामला सामने आया है। 11 सितंबर को पर्यटकों का 21सदस्यीय दल देहरादून से देवाल होते हुए वाण पहुंचा था। यहां से ये दल 12 सितंबर को रूपकुंड के लिए रवाना हुआ, लेकिन रविवार को वन विभाग ने बुग्याल में रात्रि विश्राम की अनुमति न होने के कारण पर्यटक दल को वाण क्षेत्र से कुछ दूरी पर रणकधार से वापस लौटा दिया। रूपकुंड न जा पाने के कारण पर्यटक दाल को मायूस होना पड़ा।

दल में शामिल सोनीपत (हरियाणा) निवासी परवीन ने बताया कि 21 सदस्य विभिन्न शहरों से वाण पहुंचे हैं। उन्हें ट्रेक आपरेटर ने बताया था कि बुग्यालों में अब रात्रि प्रवास की अनुमति है, लेकिन वन अधिकारियों ने आगे जाने से रोक दिया। इससे उनकी ट्रेकिंग अधूरी रह गई। दल में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के प्रोफेसर एवं पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञ डा. शशि चौहान और डा.आशीष के अलावा साफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य एम. और जोसना भी शामिल हैं।

इस संबंध में बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी प्रणाली रमेश उमरे ने बताया कि पर्यटकों को बुग्याली क्षेत्र में ट्रेकिंग की अनुमति है, लेकिन कैंपिंग और रात्रि विश्राम पर हाईकोर्ट के आदेश के कारण रोक जारी है। न्यायालय के निर्देशों की लागू स्थिति को लेकर मामला विधिक प्रकोष्ठ को भेजा गया है। न्यायालय की अवमानना की किसी भी संभावना से बचने के लिए फिलहाल बुग्यालों में रात ठहरने और कैंपिंग के परमिट जारी करने पर रोक है। हालांकि, नियत प्रक्रिया के तहत क्षेत्र में ट्रेकिंग की अनुमति अभी भी जारी है।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button