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परिवार बिखरने की कगार पर था, जिलाधिकारी की सूझबूझ ने बचा लिया…. जानें पूरा मामला

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देहरादून, 5 अक्टूबर 2025ः प्रशासनिक कुर्सी पर बैठे अफसर केवल आदेश नहीं देते, बल्कि कभी-कभी रिश्तों को भी जोड़ते हैं। ऐसा ही एक संवेदनशील उदाहरण देहरादून में सामने आया, जब जिलाधिकारी सविन बंसल ने अपनी सूझबूझ और संवेदनशीलता से एक परिवार को बिखरने से बचा लिया।

खुड़बुड़ा निवासी जसवंत सिंह और उनकी पत्नी ने अपने पुत्र और पुत्रवधू को घर से बेदखल करने की गुहार जिलाधिकारी से लगाई थी। उन्होंने कहा कि वे दोनों उनसे प्रताड़ित हैं और अब साथ रहना संभव नहीं। इस पर जिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को बुलाकर दो बार सुनवाई की और रिश्तों को जोड़ने का रास्ता चुना। सविन बंसल ने न केवल बुजुर्ग दंपति की पीड़ा को सुना, बल्कि उनके बेटे-बहू की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को भी समझा। बेटे का छोटा-सा कपड़ों का कारोबार है, घर में तीन नन्हे बच्चे हैं, और आर्थिक हालात कमजोर हैं।

डीएम ने बुजुर्ग दंपति से कहा कि जीवन के इस दौर में अपनों का साथ सबसे बड़ा सहारा होता है। बेटे-बहू को घर से निकाल देना कोई समाधान नहीं, बल्कि एक नई दूरी की शुरुआत होगी। उन्होंने बेटे-बहू को भी समझाया कि माता-पिता केवल जिम्मेदारी नहीं, आशीर्वाद होते हैं। जिलाधिकारी के मानवीय हस्तक्षेप से माहौल भावुक हो उठा। आंसुओं में पिघलती नाराजगी के बीच दोनों पक्षों ने साथ रहने का फैसला किया।

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