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उर्गम घाटी में खुले फ्यूंला नारायण धाम के कपाट, महिला पुजारी करती हैं यहां भगवान का दिव्य शृंगार

The doors of Fuunla Narayan Dham opened in Urgam Valley, where women priests perform the divine decoration of the Lord

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उर्गम घाटी में खुले फ्यूंला नारायण धाम के कपाट, महिला पुजारी करती हैं यहां भगवान का दिव्य शृंगार

परंपरा के अनुसार श्रावण संक्रांति पर खोले जाते हैं धाम के कपाट, ऋषि परंपरा से हुए धार्मिक अनुष्ठान, पांच किमी की पैदल चढ़ाई नापकर पहुंचते हैं यहां श्रद्धालु

देहरादून, 16 जुलाई 2026:  चमोली जिले की उर्गम घाटी में समुद्रतल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर घने जंगलों के बीच स्थित भगवान फ्यूंला नारायण धाम के कपाट श्रावण संक्रांति पर गुरुवार को विधि-विधान से खोल दिए गए। कपाट खुलने से पहले महिला पुजारी ने भगवान
नारायण का फूलों से विशेष शृंगार किया। इसके बाद भगवान को सत्तू बाड़ी का विशेष भोग लगाया गया। दोपहर करीब एक बजे श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश किया।

फ्यूंला नारायण धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पीढ़ियों पुरानी परंपरा आज भी निर्वाह होता है। इसके तहत पुरुष पुजारी के साथ महिला पुजारी भी भगवान नारायण की सेवा व शृंगार की जिम्मेदारी निभाती हैं। लेकिन, भगवान नारायण के शृंगार का विशेष अधिकार सिर्फ महिला पुजारी को ही प्राप्त है। इस वर्ष के लिए आशीष पंवार व आनंदी देवी को मंदिर की सेवा का जिम्मा सौंपा गया है। मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं। उनके साथ माता लक्ष्मी और जय-विजय द्वारपाल के रूप में स्थापित हैं।

इस अवसर पर भरकी के प्रधान चंद्र मोहन सिंह, पूर्व प्रधान दुर्लभ सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह, पंचनाम देवता के पुजारी अब्बल सिंह पंवार, आचार्य मनोहर प्रसाद सेमवाल, महिला समिति के सचिव रघुवीर सिंह चौहान, लक्ष्मण सिंह पंवार, बलवंत सिंह नेगी, मेला समिति के कोषाध्यक्ष नंद सिंह नेगी, दीपा देवी, आशुतोष नेगी, जितेंद्र पंवार, जितेंद्र कंडवाल, किशन सिंह व रणजीत सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कपाट खुलने के अवसर को यादगार बनाने के लिए फ्यूंला नारायण फ्रेंड्स ग्रुप के 25 से अधिक स्वयंसेवकों की ओर से मंदिर व परिसर की भव्य सजावट की गई थी।

अलग-अलग गांवों के परिवार निभाते हैं पुजारी का दायित्व

परंपरा के अनुसार भरकी, भेंटा, पिलखी, गंवाणा और अरोसी गांवों के परिवार बारी-बारी से प्रत्येक वर्ष मंदिर की पुजारी का दायित्व निभाते हैं। श्रावण संक्रांति पर खुलने वाले इस धाम के कपाट प्रत्येक वर्ष नंदा अष्टमी के अगले दिन नवमी तिथि को शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं।

ऐसे पहुंचेें फ्यूंला नारायण धाम

श्रद्धालु ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से हेलंग पहुंचने के बाद निजी वाहन से लगभग 14 किमी दूर भरकी गांव पहुंचते हैं। यहां से फ्यूंला नारायण धाम करीब पांच किमी  की पैदल दूरी पर है। मंदिर परिसर में रात्रि विश्राम की व्यवस्था बेहद सीमित है, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने साथ गर्म कपड़े, जरूरी दवाएं और आवश्यक सामान साथ ले जाना पड़ता है। इस यात्रा के लिए भरकी गांव से स्थानीय गाइड भी आसानी से मिल जाते हैं।

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