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11 फीट खोदने के बाद भी नहीं चल पाया कल्प केदार धाम का पता, जारी रहेगी खुदाई

No trace of Kalp Kedar Dham found even after digging 11 feet; excavation to continue.

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11 फीट खोदने के बाद भी नहीं चल पाया कल्प केदार धाम का पता, जारी रहेगी खुदाई

आपदा प्रभावित धराली में प्राचीन कल्प केदार मंदिर की तलाश में ग्रामीण एक्सकेवेटर मशीन से करवा रहे खुदाई, रविवार को पूजा-अर्चना के साथ हुई थी इसकी शुरुआत


देहरादून, 13 अक्टूबर 2023: बीते वर्ष धराली में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर की तलाश को खुदाई का काम जारी है। दो
दिन में यहां लगभग 11 फीट की खुदाई हो चुकी है, लेकिन अभी तक मंदिर नजर नहीं आया है।  ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद रविवार को यहां एक्सकेवेटर मशीन से खुदाई शुरू करवाई थी।

खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के मलबे में दब चुके प्राचीन कल्प केदार मंदिर की खुदाई पहली बार नहीं हो रही है। यह मंदिर अब तक करीब तीन बार बाढ़ के दौरान मलबे में दब चुका है, इसलिए ग्रामीणों को भरोसा है कि इस बार भी वह मंदिर को मलबे से बाहर निकालने में सफल हो जाएंगे। श्री कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार का कहना है कि कभी यहां 240 मंदिरों का समूह रहा है, लेकिन 18वीं व 19वीं सदी में बाढ़ के कारण कई बार मलबे में दबने के कारण कालांतर में एक मंदिर ही शेष रह गया था।

बताया कि  बीते पांच अगस्त को धराली आपदा की बरसी पर ग्रामीणों ने गांव के आराध्य  सोमेश्वर देवता की अनुमति से मंदिर को मलबे से बाहर निकालने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में नवरात्र के पहले दिन से खुदाई का कार्य शुरू किया गया। इस कार्य के लिए सभी लोग चंदा इकट्ठा कर धनराशि जुटा रहे हैं।

जीपीएस की मदद से मिली थी मंदिर की लोकेशन

पांच अगस्त 2025 को धराली में खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के मलबे में कल्प केदार मंदिर का ऊपरी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया था और मंदिर मलबे में दब गया था। आपदा के बाद 21 अगस्त को श्री कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार, सचिव संजय पंवार, संयोजक दुर्गेश पंवार, सहसचिव संतोष पंवार, सदस्य सचेंद्र पंवार, भजन आदि ने जीपीएस ट्रेकिंग की मदद से मंदिर को खोजकर मलबे के बीच मंदिर के मूल स्थान को चिह्नित किया था।

सौ साल बाद दोबारा हो रही खुदाई

बताते हैं कि कल्प केदार मंदिर करीब 240 मंदिरों का समूह था, जिनमें से अधिकांश मंदिर 1803 में आई विनाशकारी बाढ़ के मलबे में दब गए थे। वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई देते थे, लेकिन 1926 में आई बाढ़ में फिर मंदिर का आधा हिस्सा दब गया। पिछले वर्ष पांच अगस्त फिर इसी कहानी दोहराव हुआ और मंदिर मलबे में समा गया।

कल्प केदार मंदिर के बारे में

गंगोत्री हाईवे से महज 50 मीटर की दूरी पर खीर गंगा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर कत्यूरी स्थापत्य शैली में निर्मित था। मंदिर का गर्भगृह जमीन से करीब सात मीटर नीचे था, जहां सफेद स्फटिक का शिवलिंग विराजमान था। इसकी विशिष्ट बनावट और प्राचीनता श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

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