हेमकुंड साहिब और लोकपाल तीर्थ की यात्रा ने लिया शीतकाल के लिए विराम
Pilgrimage to Hemkund Sahib and Lokpal Tirath pauses for the winter season.

हेमकुंड साहिब और लोकपाल तीर्थ की यात्रा ने लिया शीतकाल के लिए विराम

अंतिम अरदास में शामिल हुए 6,123 श्रद्धालु, हेमकुंड परिसर में बर्फ की एक फीट मोटी चादर बिछी देख खिल उठे श्रद्धालुओं के चेहरे, सभी ने की सुख-समृद्धि, शांति और लोककल्याण की कामना
देहरादून, 10 अक्टूबर 2026: ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के उद्घोष और सेना के बैंड की मधुर लहरियों के बीच चमोली जिले की भ्यूंडार घाटी में समुद्रतल से 15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शनिवार दोपहर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस मौके पर देश-विदेश से आए 6,123 श्रद्धालुओं ने दरबार साहिब में मत्था टेका और सुख-समृद्धि, शांति और लोककल्याण की कामना की।
कपाट बंद होने के उत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं के जत्थे सुबह पांच बेस कैंप घांघरिया से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुए। अटलाकोटी से हेमकुंड तक तीन किमी हिस्से में बर्फ के बीच चलते हुए से जत्थे आठ बजे वहां पहुंचे। धाम में भी एक फीट से अधिक बर्फ जमी हुई थी, जिसे देखकर श्रद्धालुओं के चेहरे खिलखिला उठे। कपाट बंद करने की प्रक्रिया के तहत सुबह दस बजे गुरुद्वारे में सुखमणी साहिब का पाठ, पूर्वाह्न 11:20 बजे शबद-कीर्तन और दोपहर 12:30 बजे यात्राकाल की अंतिम अरदास हुई।
इस मौके पर गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने यात्राकाल के दौरान सेवा कार्यों के लिए प्रशासन, पुलिस व एसडीआरएफ समेत सभी विभागों, सेवादारों व स्थानीय निवासियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद दोपहर एक बजे सेना के बैंड की मधुर लहिरयों के बीच हुक्मनामा लेकर गुरुग्रंथ साहिब को दीवान हाल से पंज प्यारों की अगुआई में सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया और ठीक दो बजे धाम के कपाट बंद कर दिए गए। इससे पहले निशान साहिब का चोला बदला गया।
सप्तशृंग घाटी की खूबसूरती पर रीझे पाकिस्तानी श्रद्धालु
पाकिस्तान से आया श्रद्धालुओं का 40 सदस्यीय जत्था हिमाच्छादित सप्तशृंग घाटी के मनमोहक दृश्यों को देख प्रफुल्लित नजर आया। यह जत्था पेशावर से जत्थेदार पापेंद्र सिंह के नेतृत्व में हेमकुंड साहिब पहुंचा था। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को आस्था, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक एकता के अनुपम संगम में बदल दिया।




