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हिमालय के सबसे ऊंचे धाम में विराजे शेषावतार लक्ष्मण यति

Sheshavatar Lakshman Yeti seated in the highest abode of the Himalayas

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हिमालय के सबसे ऊंचे धाम में विराजे शेषावतार लक्ष्मण यति

चमोली जिले की भ्यूंडार घाटी में समुद्रतल से 15,225 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है लोकपाल लक्ष्मण मंदिर, गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब में मत्था टेकने के बाद लोकपाल के दर्शन करते हैं श्रद्धालु

देहरादून, 22 मई, 2026: उत्तराखंड हिमालय के चमोली जिले की भ्यूंडार घाटी में समुद्रतल से 15,225 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शुक्रवार पूर्वाह्न 11:15 बजे बर्फ की फुहारों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वहीं, मंदिर परिसर में ही स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के कपाट आज शनिवार को खोले जाएंगे। कपाट खुलने के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं के मौजूद रहने की उम्मीद है। दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं का पहला जत्था आज सुबह बेस कैम्प घांघरिया से हेमकुंड साहिब के रवाना होगा। यह जत्था शुक्रवार को गुरुद्वारा गोविंदघाट से घांघरिया पहुंचा।

विश्व में सबसे ऊंचाई पर दंडी पुष्कर्णी सरोवर के समीप स्थित यह पवित्र धाम प्राकृतिक सौंदर्य, अध्यात्म और हिमालयी संस्कृति का अद्भुत संगम माना जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं में कपाट खुलने को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर एक ही परिसर में सरोवर के किनारे स्थित हैं, इसलिए गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन अवश्य करते हैं। लोक मान्यता है कि यहां पर भगवान राम के भाई लक्ष्मण ने अपने शेषावतार में तपस्या की थी, इसलिए कालांतर में यहां उनके मंदिर की स्थापना हुई। धाम में रात को ठहरने की सुविधा नहीं है, इसलिए श्रद्धालुओं को हर हाल में दोपहर दो बजे धाम से बेस कैम्प घांघरिया के लिए वापसी करनी पड़ती है।

लोकपाल पहुंचने के लिए तय करनी पड़ती है 16 किमी की पैदल दूरी

लोकपाल पहुंचने के लिए गोविंदघाट से पुलना तक तीन किमी की दूरी शटल सेवा और यहां से हेमकुंड साहिब तक 16 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। धाम के चारों ओर अभी भी बर्फ की मोटी चादर बिछी हुई है। सरोवर भी बर्फ से ढका हुआ है। सेना के दल ने सरोवर के एक हिस्से से बर्फ हटाकर श्रद्धालुओं के स्नान-आचमन की व्यवस्था की है।

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