Blog
गढ़वाल की लोक धरोहर को सहेजेगा पौड़ी का हेरिटेज भवन
Preserving the folk heritage of Garhwal Heritage Building of Pauri

गढ़वाल की लोक धरोहर को सहेजेगा पौड़ी का हेरिटेज भवन
गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी स्थित ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट भवन ले रहा हेरिटेज भवन के रूप में आकार, अंतिम चरण में चल रहा है इसे संवारने का कार्य, भविष्य में एक ही छत के नीचे दिखेगी गढ़वाल की गौरवशाली संस्कृति, इमारत में तैयार हो रहीं पांच अलग-अलग गैलरी
देहरादून, 19 जुलाई 2026 : गढ़वाल के शानदार इतिहास, समृद्ध लोक संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं, खूबसूरत प्रकृति और वीरों की गाथाओं को अब एक ही छत के नीचे बेहद अनूठे अंदाज में सहेजने की तैयारी है। मंडल मुख्यालय पौड़ी में ब्रिटिशकालीन कलेक्ट्रेट भवन को अब एक भव्य हेरिटेज भवन के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्वयं में अनूठी स्थापत्य कला और गौरवशाली अतीत को समेटे इस ऐतिहासिक भवन का जीर्णोद्धार कार्य अब अंतिम चरण में है। इस पूरे परिसर को जीवंत रूप देने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और संस्कृति को करीब से महसूस कर सकेंगी।
वर्ष 1840 में पौड़ी जनपद की स्थापना सहायक आयुक्त के अधीन की गई थी, जिसका मुख्यालय पौड़ी नगर में स्थापित हुआ। अब तक प्रशासनिक इकाई का संचालन अस्थायी और अलग–अलग स्थानों से किया जा रहा था, इसलिए जनपद की प्रशासनिक इकाई को चलाने के लिए एक भवन की आवश्यकता महसूस की गई। वर्ष 1850 में कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसे तैयार होने में पूरे 11 वर्ष लगे। तब इस पर 1.60 लाख की लागत आई थी। भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) के दौर का साक्षी रहे इस भवन ने 1947 में देश की आजादी के बाद आइसीएस को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में प्रतिस्थापित किया।
वर्ष 2021 में जब नया कलेक्ट्रेट भवन बनकर तैयार हुआ तो इस पुराने भवन को खाली कर दिया गया। इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए तब तत्कालीन जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने हेरिटेज भवन बनाने की पहल की। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका शिलान्यास किया। बाद में जिलाधिकारी रहे डा. आशीष चौहान और फिर वर्तमान जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने भी हेरिटेज भवन के निर्माण की दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य किया।
अब भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। तैयार होने के बाद इसमें पौड़ी जिले के इतिहास, लोक संस्कृति, परंपरा, प्रकृति व वीरगाथा को संरक्षित व प्रदर्शित किया जाएगा। हेरिटेज भवन के निर्माण में 3.11 करोड़ की लागत आ रही है। भवन में जिले की ऐतिहासिक विरासत, समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराएं, प्रकृति और वीरगाथाएं सहेजने के लिए जिला प्रशासन की ओर से 4.91 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
पांच लोकों में होंगे गौरवशाली अतीत के दर्शन
-
विरासत भूमि: इस गैलरी में जिले के इतिहास को संरक्षित व प्रदर्शित किया जाएगा।
-
वीर भूमि: इस गैलरी में जिले के वीर सपूतों की वीर गाथाओं को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
-
लोक संस्कृति: इस गैलरी में जिले के लोक वाद्ययंत्रों, आभूषणों, पौराणिक पोषाक में प्रतिमाओं और चित्रों को संरक्षित किया जाएगा। समृद्ध ग्रामीण जीवन को विशेष रूप से उकेरा जाएगा।
-
तपो भूमि: इस गैलरी में जिले के धार्मिक स्थलों को चित्रों के साथ उनकी मौलिकता, परंपरा व इतिहास सहित प्रदर्शित किया जाएगा।
-
प्रकृति लोक: इस गैलरी में पौड़ी जिले के पारिस्थितिकीय तंत्र को उकेरकर जीवंत स्वरूप प्रदान किया जाएगा।





