उत्तराखंडऑफबीटखगोल-भूगोलपर्यटनप्रेरणायूथराष्ट्रीय

जम्मू-कश्मीर में नून और कुन चोटी का आरोहण करेगी निम की टीम

NIM team to scale Nun and Kun peaks in Jammu and Kashmir

खबर को सुनें


जम्मू-कश्मीर में नून और कुन चोटी का आरोहण करेगी निम की टीम

समुद्रतल से 7,135 और 7,077 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं नून और कुन चोटियां, टीम को 15 अगस्त तक करना है इन चोटियों का सफल आरोहण, 25 अगस्त को
वापस लौटेगी टीम

देहरादून, 31 जुलाई 2026 : नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की 18 सदस्यीय टीम जम्मू-कश्मीर की काराकोरम रेंज में स्थित नून (7,135 मीटर) और कुन (7,077 मीटर) चोटियों के आरोहण को रवाना हो गई है। अभियान का नेतृत्व संस्थान के प्राचार्य कर्नल एसएस राजपुरोहित कर रहे हैं। टीम का लक्ष्य 15 अगस्त तक दोनों चोटियों का सफलतापूर्वक आरोहण करना है।

नून-कुन के लिए संस्थान का यह पहला अभियान है। इसका उद्देश्य संस्थान के प्रशिक्षकों को गढ़वाल- कुमाऊं हिमालय के भूगोल और मौसम की स्थिति में व्यावहारिक पर्वतारोहण का अनुभव प्रदान करना है, ताकि उनकी प्रशिक्षण क्षमता और दक्षता में वृद्धि हो सके। नून और कुन काराकोरम क्षेत्र की 7,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली चोटियां हैं, जो अपेक्षाकृत चढ़ाई योग्य होने के बावजूद महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियां भी पेश करती हैं। वर्तमान में मौसम अभियान के लिए अनुकूल बना हुआ है, क्योंकि कारगिल क्षेत्र मानसून से अप्रभावित है और यहां नगण्य वर्षा होती है।

टीम में 13 पर्वतारोही और नौ सहायक कर्मचारी शामिल हैं। टीम का दो अगस्त तक शपथ नाला रोड-हेड कैंप पहुंचने का कार्यक्रम है। यहां दो दिन तक अनुकूलन के
बाद टीम चार अगस्त को बेस कैंप के लिए प्रस्थान करेगी। निम के रजिस्ट्रार प्रवीन कुमार ने बताया कि दो दिन पूर्व निम की टीम नून और कुन चोटियों के आरोहण को रवाना हुई है, जो चोटियों का आरोहण कर 25 अगस्त तक वापस लौटेगी।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button