पांच सितंबर को होगा नंदा देवी लोकजात का आगाज, जारी हुआ इस धार्मिक यात्रा का दिनपट्टा
Nanda Devi Lok Jat will commence on September 5, the date sheet for this religious pilgrimage has been released.

पांच सितंबर को होगा नंदा देवी लोकजात का आगाज, जारी हुआ इस धार्मिक यात्रा का दिनपट्टा
विभिन्न पड़ावों को पार कर अनंत चतुर्दशी पर्व पर 25 सितंबर को वापस नंदा राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा लौटेगी लोकजात, सिद्धपीठ में विराजमान होगी देवी नंदा की डोली, गौड़ ब्राह्मण व 14 सयाणों को सौंपी गई लोकजात को दिव्य-भव्य स्वरूप प्रदान करने की जिम्मेदारी
देहरादून, 05 अगस्त 2026: चमोली जिले में इस वर्ष पांच सितंबर आयोजित होने वाली नंदा देवी वार्षिक लोकजात का दिनपट्टा (कैलेंडर) बुधवार को जारी कर
दिया गया। लोकजात अनंत चतुर्दशी पर्व पर 25 सितंबर को विराम लेगी। इसी दिन मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली सिद्धपीठ देवराड़ा में विराजमान हो जाएगा। इस बार ज्योष्ठ में अधिमास पड़ने के कारण आयोजन में विलंब हुआ है।
नंदा राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा में हुई बैठक में वार्षिक लोकजात और वर्ष 2027 में होने वाली नंदा देवी राजजात के निर्जन पड़ावों की व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। कहा गया कि राजजात राजा की यात्रा है और इसका आयोजन भी राजा के निर्देशों के अनुसार ही होता है। जबकि, लोकजात हर वर्ष आयोजित की जाती है। इस वर्ष यह यह आयोजन पांच से 25 सितंबर तक प्रस्तावित है। इसके लिए उन्होंने शासन-प्रशासन से यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने के साथ ही निर्जन यात्रा पड़ावों पर बिजली, पानी, शौचालय समेत अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की।
कहा गया कि लोकजात को दिव्य एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए गौड़ ब्राह्मणों और 14 सयाणों की ओर से व्यापक स्तर पर तैयारियां की जाएंगी। देवराड़ा, थराली, कुलसारी और वाण में हुई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष लोकजात और अगले वर्ष राजजात का आयोजन किया जाएगा। इससे यात्रियों को दुर्गम पड़ावों पर समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। विदित हो कि राजजात का आयोजन 12 वर्ष में एक बार होता है, लेकिन इस वर्ष अधिमास पड़ने के कारण आयोजन नहीं हो पाया। अब यह आयोजन वर्ष 2027 में प्रस्तावित है, जिसका दिनपट्टा वसंत पंचमी पर्व जारी किया जाएगा।
बैठक में नंदा देवी राजराजेश्वरी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील रावत, केंद्रीय सचिव पृथ्वी सिंह रावत, देवराड़ा मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन चंद्र हटवाल, कलम सिंह रावत, प्रेमशंकर सिंह रावत, गौरी देवी, लीला देवी, मनोज सिंह परिहार, दर्शन सिंह, मनमोहन सिंह, रणजीत सिंह, भुवन विक्रम सिंह, हरीश सती व आशा देवी समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।



