जानें कौन हैं बबीता, मन की बात में प्रधानमंत्री ने की जिनकी जमकर तारीफ
10 हजार रुपये से पूजा सामग्री की दुकान शुरू की और मेहनत के दम पर आज 40-50 हजार रुपये महीने कमा रही हैं

गाजियाबाद, 30 अगस्त 2026 : पति का साथ छूटा… फिर बच्चों की जिम्मेदारी अकेले कंधों पर आई और कोरोनाकाल में छोटा कारोबार भी बंद हो गया, लेकिन नंदग्राम की बबीता ने हालात को अपनी किस्मत नहीं बनने दिया। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से मिले महज 10 हजार रुपये से पूजा सामग्री की दुकान शुरू की और मेहनत के दम पर आज 40-50 हजार रुपये महीने कमा रही हैं। खुद आत्मनिर्भर बनने के बाद वह करीब 100 जरूरतमंद लोगों को भी इस योजना से जोड़ चुकी हैं। बबीता के इसी हौसले और संघर्ष की कहानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में देश-दुनिया के सामने रखी।
ऐसे लिखी आत्मनिर्भरता की दास्तान
बबीता की शादी फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में हुई थी, लेकिन वैवाहिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। घरेलू हिंसा से हालात बिगड़े तो पिता उन्हें और उनके तीन बच्चों को वापस गाजियाबाद ले आए। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। कोरोनाकाल में लॉकडाउन के कारण उनका छोटा कारोबार भी बंद हो गया।
वर्ष 2022 में किसी ने उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के बारे में बताया। उन्होंने योजना के तहत 10 हजार रुपये का ऋण लिया और पूजा सामग्री की दुकान शुरू कर दी। छोटे कारोबार से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। कारोबार बढ़ाने के लिए उन्होंने बाद में 20 हजार और फिर 50 हजार रुपये का ऋण लिया।
बबीता के सामने सिर्फ घर चलाने की चुनौती नहीं थी, बल्कि बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी भी थी। उन्होंने अपने बड़े बेटों विनय और राहुल को पढ़ाया और दोनों को स्नातक कराया। दोनों अब नौकरी कर रहे हैं। छोटा बेटा अभी 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है।
खुद संभलीं तो दूसरों का हाथ थामा
मुश्किलों से निकलकर आत्मनिर्भर बनीं बबीता ने दूसरों का हाथ भी थामा। बबीता कहती हैं कि जिस योजना ने उन्हें मुश्किल दौर से उबरकर अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद की, उसकी जानकारी दूसरे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना भी उनकी जिम्मेदारी है।



