उत्तराखंडस्वास्थ्य

बेटे की जगह बेटी सौंपने का आरोप…देहरादून के इस अस्पताल का है मामला

दस्तावेज में नवजात का लिंग ‘मेल’ दर्ज, परिवार ने सीसीटीवी जांच और डीएनए परीक्षण की मांग की

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देहरादून, 30 अगस्त 2026 : दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात की पहचान को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि प्रसव के बाद उन्हें बेटे के बजाय बेटी सौंप दी गई। परिवार का दावा है कि अस्पताल से मिले दस्तावेज में नवजात का लिंग ‘मेल’ दर्ज है, जबकि उन्हें सौंपी गई नवजात बच्ची है। मामले में परिजनों ने ऑपरेशन थिएटर से लेकर नवजात सौंपे जाने तक की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने और बच्चे की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए परीक्षण कराने की मांग की है।

शिकायत स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल तक पहुंचने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि दस्तावेज में दर्ज जानकारी में त्रुटि हुई है, अस्पताल स्तर पर कोई लापरवाही हुई है या फिर परिजनों की ओर से लगाया गया नवजात बदलने का आरोप सही है।

22 अगस्त को प्रसव के लिए भर्ती हुई थी महिला

बताया गया कि परिजन सुमित कुमार के अनुसार उनकी पत्नी का दून अस्पताल में उपचार चल रहा था। प्रसव के लिए उन्हें 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में चिकित्सकों ने सामान्य प्रसव की संभावना जताई थी, लेकिन 24 अगस्त को डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। परिवार की सहमति के बाद महिला को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।

ऑपरेशन के बाद नवजात को देखने नहीं देने का आरोप

सुमित कुमार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद परिवार के सदस्यों को तत्काल नवजात को देखने नहीं दिया गया। कुछ समय बाद अस्पताल की ओर से जब नवजात उन्हें सौंपा गया तो परिजनों ने उसके लड़की होने की बात कही। इसके बाद परिवार को संदेह हुआ। उनका कहना है कि अस्पताल से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज में नवजात का लिंग ‘मेल’ दर्ज है, जबकि उनके सामने मौजूद नवजात बच्ची है। दस्तावेज में दर्ज जानकारी और सौंपे गए नवजात के बीच अंतर को देखते हुए परिजनों ने नवजात की अदला-बदली की आशंका जताई है।

सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग

परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से ऑपरेशन थिएटर के बाहर से लेकर नवजात को सौंपे जाने तक की पूरी प्रक्रिया की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उनका कहना है कि डीएनए परीक्षण के माध्यम से नवजात की वास्तविक पहचान सुनिश्चित की जाए। अस्पताल प्रशासन और जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे मामले की वास्तविकता क्या है।

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