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रिमझिम फुहारों के बीच कैलास के लिए रवाना हुई मां नंदा देवी की बड़ी जात, बारह वर्ष बाद ससुराल जा रही नंदा

Amidst a light drizzle, the 'Badi Jaat' of Mother Nanda Devi set out for Kailash; Nanda journeys to her marital home after twelve years.

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रिमझिम फुहारों के बीच कैलास के लिए रवाना हुई मां नंदा देवी की बड़ी जात, बारह वर्ष बाद ससुराल जा रही नंदा

चमोली जिले में मां नंदा देवी बड़ी जात का उल्लास, सुंग में जन्मा चौसिंग्या खाडू रहा कुरुड़ से इस धार्मिक यात्रा की अगुआई, नंदा की विदा करते हुए छलछलाई हजारों भक्तों की आंखें

देहरादून, 05 सितंबर 2026 : रिमझिम फुहारों के बीच शनिवार शाम जब लोक की अधिष्ठात्री देवी नंदा ने मायके कुरुड़ से कैलास के लिए प्रस्थान किया तो हजारों भक्तों के नेत्र छलछला उठे। नंदा धाम लोकवाद्यों की मधुर लहरियों के साथ मां नंदा के जागरों से गुंजायमान हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो लोग बेटी को ससुराल के लिए विदा कर रहे हैं। कोई हाथ जोड़कर मां से परिवार की खुशहाली मांग रहा था तो कोई बेटी के रूप में नंदा को आशीर्वाद देते हुए भावुक हो रहा था। बारह वर्ष के अंतराल में आयोजित हो रही 296 किमी की यह पैदल धार्मिक यात्रा 26 पड़ावों से होकर गुजरेगी। इनमें पांच निर्जन पड़ाव भी शामिल हैं। सुंग में जन्मा चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) मां नंदा देवी बड़ी जात की अगुआई कर रहा है।

नंदा धाम कुरुड़ में सुबह से उल्लास का माहौल था। अपनी आराध्य देवी की एक झलक पाने को विभिन्न स्थानों से हजारों नंदा भक्त कुरुड़ पहुंचे हुए थे। पं. मुंशी चंद्र गौड़, दिनेश गौड़, कन्हैया प्रसाद, अशोक व राजेंद्र प्रसाद ने विभिन्न अनुष्ठान संपन्न किए। नंदा डोली की अगवानी के लिए कुंडबगड़ व सुंग गांव से भूम्याल और रामणी गांव से त्यूणा रजकोटी देवता के पश्वा कुरुड़ पहुंचे और फिर मंदिर परिसर में सभी देवताओं का भव्य मिलन हुआ। इस भावपूर्ण दृश्य को देखकर भक्तों के नेत्र छलछला उठे। शाम ठीक चार बजे शक्ति पूजा के बाद नंदा की डोली दस किमी दूर स्थित अपने पहले पड़ाव कुमजुग के लिए रवाना हुई और देर शाम वहां पहुंच गई। धरगांव समेत विभिन्न स्थानों पर भक्तों ने बड़ी जात की अगवानी की। रविवार को बड़ी जात कुनबगड़ होते हुए दूसरे पड़ाव पर लुंतरा गांव पहुंचेगी।

नंदा देवी बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत (सेनि) ने कहा कि कुरुड़ मंदिर से पूरे मान-सम्मान के साथ नंदा को ससुराल कैलास के लिए विदा किया गया है। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष सुखवीर रौतेला, बंड डोली के अध्यक्ष अशोक गौड़, बंड विकास संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, अयोध्या हटवाल, दीपक पंत, तेजवीर कंडेरी, लक्ष्मण बिष्ट, वीरेंद्र थोकदार, उषा रावत, कमल रतूड़ी, हरीश पुरोहित आदि मौजूद रहे।

बेटी नंदा को समौण भेंट कर रहे मैती

बड़ी जात में बंड क्षेत्र की नंदा डोली के साथ देव निसाण (प्रतीक) भी शामिल हैं। यात्रा मार्ग पर जहां से भी डोली गुजर रही हैं, मैती (मायके वाले) अपनत्व के भाव से उसका अभिनंदन कर रहे हैं। वह काकड़ी (पहाड़ी खीरा), गुदड़ी (तोरी), मुंगरी (मक्का)  समेत स्थानीय उत्पाद देवी को भेंट कर रहे हैं। मां नंदा को पहाड़ में बेटी का प्रतिरूप माना जाता है। इसलिए नंदा की विदाई यहां महज धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बेटी को मायके से विदा करने की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

चरबंग पहुंची मां राजराजेश्वरी की डोली

कुरुड़ स्थित नंदा देवी सिद्धपीठ से मां राजराजेश्वरी की वार्षिक लोकजात ने भी शनिवार को विधि-विधान से कैलास के लिए प्रस्थान किया। लोकजात का पहला
पड़ाव चरबंग है। कार्यक्रम के अनुसार मां राजराजेश्वरी की डोली नंदा सप्तमी पर्व पर 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल स्थित वेदनी कुंड पहुंचेगी। यहां पितृ तर्पण के साथ विधि-विधान पूर्वक भगोती (भगवती) नंदा को कैलास के लिए विदा किया जाएगा।  मां राजराजेश्वरी बधाण परगना की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी डोली वेदनी बुग्याल में पूजा-अर्चना के बाद थराली के देवराड़ा लौटती है और  छह माह के लिए यहीं विराजमान हो जाती है। रविवार कोलोकजात चरबंग से कुनबगड़ होते हुए अपने दूसरे पड़ाव मथकोट गांव पहुंचेगी।

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