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गायब हाथी दांतों की तलाश तेज, पुलिस और वन विभाग ने खंगाले रिकार्ड

Search intensified for missing elephant tusks; police and forest department examine records

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गायब हाथी दांतों की तलाश तेज, पुलिस और वन विभाग ने खंगाले रिकार्ड

लालढांग रेंज कार्यालय पहुंची सीआइयू और विभागीय जांच टीम, कार्मिकों से जुटाई जानकारी, रेंज कार्यालय के अभिलेखों में दर्ज 15 हाथी दांतों में मिले सिर्फ 10, वजन भी 35 किलो कम

देहरादून, 02 नवंबर 2026: लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज के मालखाने से पांच हाथी दांत गायब होने के मामले में पुलिस और वन विभाग ने जांच तेज कर
दी है। सोमवार को पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट (सीआइयू) ने रेंज कार्यालय पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं, हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने भी अभिलेख खंगाले। हाथी दांत गायब होने के साथ ही उपलब्ध दांतों के वजन में 35 किलो की कमी मिलने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देश पर प्रदेशभर के वन रेंज कार्यालयों में जब्त और बरामद हाथी दांतों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इसी क्रम में 31 अक्टूबर को लालढांग रेंज कार्यालय में जांच के दौरान विभागीय पंजिका में दर्ज 15 हाथी दांतों के सापेक्ष केवल 10 मिले। उपलब्ध दांतों का वजन भी अभिलेखों में दर्ज वजन से 35 किलो कम मिला। इस पर रविवार को लैंसडौन वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी सुधीर कुमार ने यमकेश्वर थाने में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया। घटनास्थल कोटद्वार थाना क्षेत्र में होने के कारण मुकदमा वहां स्थानांतरित कर दिया गया।

सोमवार को सीआइयू प्रभारी दीपक धारीवाल ने टीम के साथ लालढांग रेंज कार्यालय पहुंचकर मौके का मुआयना किया। इस दौरान कर्मचारियों के संबंध में भी जानकारी जुटाई गई। वहीं, विभागीय जांच समिति के अध्यक्ष डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध लालढांग वन विश्राम गृह में संबंधित अभिलेखों की पड़ताल कर रहे हैं।

मार्च तक मालखाने के रिकॉर्ड में दर्ज थे सभी 15 हाथी दांत

बताया जा रहा कि मार्च में उप प्रभागीय वनाधिकारी ने रेंज कार्यालय का निरीक्षण किया था। तब मालखाने के रिकार्ड में 15 हाथी दांत मौजूद होने का उल्लेख है। ऐसे में मालखाने की सुरक्षा, अभिलेखों के रखरखाव और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। पुलिस और वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि हाथी दांत कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए।

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