
बर्फबारी के बाद गोमुख-तपोवन समेत ऊंचाई वाले ट्रेक रूट बंद
गंगोत्री नेशनल पार्क व उत्तरकाशी वन प्रभाग ने सुरक्षा के मद्देनजर लिया यह निर्णय, उत्तरकाशी जिले में समुद्रतल से चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक रूटों पर रोकी गई है आवाजाही
देहरादून, 02 नवंबर 2026: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते गोमुख-तपोवन ट्रेक समेत जिले के चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक रूटों पर आवाजाही रोक दी गई है। गंगोत्री नेशनल पार्क और उत्तरकाशी वन प्रभाग ने पर्यटकों व ट्रेकरों की सुरक्षा के मद्देनजर फिलहाल नए परमिट जारी नहीं करने का निर्णय लिया है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक मयंक कुमार ने बताया कि 29 अक्टूबर को हुई बर्फबारी के बाद गोमुख-तपोवन ट्रेक पर भारी मात्रा में बर्फ जमा है। सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेक पर आवाजाही बंद रखी गई है। इसके अलावा केदारताल, कालिंदी खाल व उडनकोल आदि स्थानों के लिए भी कोई नए परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। बताया कि मार्ग की स्थिति का आकलन करने और सुरक्षित होने की पुष्टि के बाद ही इसे दोबारा खोलने का निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, नेलांग घाटी और गरतांग गली पर्यटकों के लिए खुले हुए हैं। इधर, उत्तरकाशी वन प्रभाग के डीएफओ जीवन मोहन दगड़े ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण ट्रेकिंग मार्गों पर आवाजाही जोखिमभरी हो गई है। स्थिति सामान्य होने तक इन रूटों के लिए अनुमति जारी नहीं की जाएगी।
इस सीजन शायद ही दोबारा शुरू हो पाए ट्रेकिंग गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में लगातार बदल रहे मौसम और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी के चलते इस सीजन में ट्रेकिंग दोबारा शुरू होने की उम्मीद कम ही है। बीते माह मौसम बिगड़ने पर ट्रेकरों और पर्वतारोहियों के फंसने की घटना के बाद अब केदारताल क्षेत्र में हिमस्खलन की घटना ने भी उच्च हिमालयी ट्रेक रूटों पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट सामान्यतः हर वर्ष एक अप्रैल को खोले जाते हैं और 30 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में सीजन के अंतिम चरण में ट्रेक रूटों को दोबारा खोलने के लिए समय कम बचा है। मौसम के बार-बार बदलने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ जमने से ट्रेकिंग गतिविधियों को सुरक्षित तरीके से संचालित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। साथ ही पर्यटक और ट्रेकरों को इस सीजन में उच्च हिमालयी ट्रेक रूटों पर जाने का मौका मिलने की संभावना भी कम है। सो, उन्हें अगले ट्रेकिंग सीजन का इंतजार करना पड़ सकता है।



