आपदाउत्तराखंडचारधाम यात्रादुर्घटनाराष्ट्रीय

ट्राली में बैठने के दौरान हुई धक्का-मुक्की, यात्री की नदी में गिरकर मौत

A scuffle broke out while boarding a trolley, resulting in a passenger falling into a river and dying.

खबर को सुनें


ट्राली में बैठने के दौरान हुई धक्का-मुक्की, यात्री की नदी में गिरकर मौत

द्वितीय केदार मध्यमेश्वर पैदल मार्ग पर सोमवार सुबह हुआ हादसा, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला था मृतक

देहरादून, 03 अगस्त 2026: द्वितीय केदार मध्यमेश्वर पैदल मार्ग पर सोमवार सुबह ट्राली में बैठने को लेकर हुई धक्का-मुक्की में एक यात्री मोरखंडा नदी में जा गिरा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला था।

मध्यमेश्वर पैदल मार्ग पर सोमवार सुबह करीब 11 बजे ट्राली के पास भीड़ के दौरान एक यात्री नदी में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। एसडीआरएफ और
डीडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर यात्री को उपचार के लिए रवाना किया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए एयर एंबुलेंस की भी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान 35-वर्षीय अंजुल कुमार के रूप में हुई। वह  उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला है।

हालांकि, लोनिवि ऊखीमठ के अधिशासी अभियंता राजेश नैथानी का कहना है कि कोई यात्री ट्राली से नहीं गिरा, बल्कि भीड़ के कारण हुई धक्का-मुक्की में वह पहाड़ी से नदी में जा गिरा। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बनतोली में स्थायी पुल निर्माण में हो रहे विलंब पर गहरी नाराजगी जताई। पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद राणा का कहना है कि मोरखंडा नदी पर लंबे समय से पुल नहीं बनने के कारण श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों को जान का जोखिम उठाना पड़ रहा है। यह घटना भी इसी का परिणाम है।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button