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उत्तराखंड में यहां होती है देव वृक्ष के रूप में देवदार की पूजा

In Uttarakhand, the deodar tree is worshipped as a sacred tree.

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उत्तराखंड में यहां होती है देव वृक्ष के रूप में देवदार की पूजा

टोंस वन प्रभाग पुरोला से जुड़े कोठीगाड रेंज के बालचा में देवदार का सबसे अधिक मोटाई वाला महावृक्ष है, जिसकी परिधि 820 सेमी से 261 सेमी व्यास की है, कोठीगाड रेंज के बालचा में 704 वर्ष पुराना देवदार महावृक्ष वर्ष 1215 में उगा था और 1919 तक खड़ा रहा। इसके तने का व्यास 1.4 मीटर और परिधि 4.39 मीटर थी

देहरादून, 03 अगस्त 2026: देवदार के वृक्ष पहाड़ों में विशेष महत्व रखते हैं। स्थानीय लोग इसे देव वृक्ष मानकर पूजा करते हैं। हिमालय के हरे-भरे देवदार और बांज के जंगल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। चकराता वन प्रभाग के कनासर और बावर रेंज तथा टोंस वन प्रभाग के कोठीगाड रेंज में देवदार की श्रेष्ठ प्रजाति के पेड़ पाए जाते हैं। यहां के सबसे उम्रदराज महावृक्षों की आयु 600 से 700 वर्ष के बीच है।

चकराता वन प्रभाग की कनासर रेंज में स्थित देवदार महावृक्ष की गोलाई 6.35 मीटर और ऊंचाई 70 मीटर है। इसकी आयु 600 वर्ष से अधिक बताई जाती है। बावर रेंज के कथियान के नुणाईथात जंगल में भी एक विशाल देवदार महावृक्ष है, जिसकी परिधि 520 सेमी है। टोंस वन प्रभाग के कोठीगाड रेंज के बालचा में देवदार का सबसे मोटा महावृक्ष है, जिसकी परिधि 820 सेमी और व्यास 261 सेमी है। इन महावृक्षों को 1994 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा देवदार की श्रेष्ठ प्रजाति माना गया था।  बालचा में 704 वर्ष पुराना देवदार महावृक्ष वर्ष 1215 में उगा था। इसका तना 1.4 मीटर व्यास और 4.39 मीटर परिधि का था। यह वृक्ष सात सदी के प्राकृतिक इतिहास का प्रतीक है। इसकी अनुप्रस्थ काट देहरादून में एफआरआइ के संग्रहालय में संरक्षित है।

जौनसार-बावर में नुणाई मेले के दौरान होती है देवदार की पूजा

अगस्त में नुणाई मेले के दौरान देवदार की पूजा की जाती है। बावर रेंज के कथियान में स्थानीय भेड़ और मवेशी पालक तीन साल में एक बार लोक उत्सव के दौरान देववृक्ष की पूजा करते हैं। शिलगांव खत के लोग पांच साल में एक बार बिस्सू मेले का आयोजन करते हैं। नुणाई मेले में ग्रामीण विधि-विधान से देववृक्ष की पूजा कर प्रकृति की खुशहाली की कामना करते हैं।

सबसे बड़ा देवदार महावृक्ष जम्मू-कश्मीर के डोडा में

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भलेसा वन रेंज में देवदार का सबसे बड़ा महावृक्ष है, जिसकी ऊंचाई 54 फीट और तने की गोलाई 35 फीट है। इसकी आयु छह से सात सौ वर्ष के बीच बताई जाती है।

यहां हैं देवदार की श्रेष्ठ प्रजाति के घने जंगल

मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल क्षेत्र डा. धीरज पांडेय ने बताया कि चकराता वन प्रभाग के कनासर और बावर रेंज और टोंस वन प्रभाग के कोठीगाड रेंज में देवदार की श्रेष्ठ प्रजाति के घने जंगल हैं। वन विभाग जल-जंगल को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। बताया कि देवदार की लकड़ी सुगंधित, मजबूत और टिकाऊ होती है। इसका उपयोग औषधीय गुणों के लिए भी किया जाता है। देवदार की लकड़ी में कीड़ा नहीं लगता और इसके सड़ने-गलने का खतरा नहीं होता।

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