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पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना केदारनाथ धाम में चल रहा  ‘कैरी मी बैक’ अभियान

The 'Carry Me Back' campaign being run in Kedarnath Dham has become an example of environmental protection

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पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना केदारनाथ धाम में चल रहा  ‘कैरी मी बैक’ अभियान

 

अभियान के तहत अबत तक  केदारनाथ से गौरीकुंड पहुंचाया जा चुका है सात टन सूखा कचरा, गौरीकुंड में किया जा रहा इस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित

देहरादून, 30 जुलाई 2026 : रुद्रप्रयाग जनपद में समुद्रतल से 11,657 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाए रखने के लिए चलाया जा रहा ‘कैरी मी बैक’ अभियान पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रहा है। अब तक केदारनाथ धाम से सात टन सूखे कचरे को गौरीकुंड लाकर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है। कचरे को गौरीकुंड लाने की जिम्मेदारी स्वयं श्रद्धालु निभा रहे हैं।

कुछ समय पूर्व जिला प्रशासन ने हीलिंग हिमालय फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से केदारनाथ धाम में ‘कैरी मी बैक’ अभियान शुरू किया था। इसके तहत श्रद्धालुओं को धाम में जूट के विशेष बैग उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनमें वे स्वेच्छा से चार से पांच किलो सूखा कचरा भरकर वापसी में गौरीकुंड तक लेकर आते हैं। कचरे में मुख्य रूप से प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य पदार्थों के रैपर, पैकेजिंग सामग्री और अन्य सूखा अपशिष्ट शामिल होता है। गौरीकुंड पहुंचने के बाद एकत्रित कचरे को सुलभ इंटरनेशनल की ओर से पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप अंतिम निस्तारण के लिए भेजा जाता है।

हीलिंग हिमालय फाउंडेशन श्रद्धालुओं को जूट के बैग उपलब्ध कराने के साथ-साथ गौरीकुंड में कचरा संग्रहण की व्यवस्था भी संभाल रहा है। नगर पंचायत केदारनाथ के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती बताते हैं कि यात्रा सीजन के दौरान इस अभियान के माध्यम से अब तक सात टन सूखा कचरा धाम से गौरीकुंड पहुंचाया जा चुका है। श्रद्धालु इस कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं और उनके सहयोग से यह पहल आगे भी लगातार जारी रहेगी, ताकि केदारनाथ धाम को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखा जा सके। साथ ही अन्य लोग भी इससे प्रेरणा लें।

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