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17 अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे रुद्रनाथ धाम के कपाट

3600 मीटर की ऊंचाई पर विराजमान हैं भगवान शिव के एकानन स्वरूप, कपाट बंद होने के बाद गोपीनाथ मंदिर में होगी शीतकालीन पूजा, धाम में बढ़ी श्रद्धालुओं की आवाजाही

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देहरादून, 30 अगस्त 2026 : चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान रुद्रनाथ धाम के कपाट 17 अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की शीतकालीन पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होगी। कपाट बंद होने में अब समय कम बचा है, ऐसे में धाम में दर्शन के लिए तीर्थ यात्रियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है।

रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट ने बताया कि श्रद्धालु करीब 18 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर धाम पहुंच रहे हैं। वर्तमान में यात्रा के लिए मौसम और परिस्थितियां अनुकूल हैं। सितंबर में रुद्रनाथ घाटी में विभिन्न प्रजातियों के फूल खिलने लगते हैं, जिससे यहां की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है।

उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था जगह-जगह उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर भी यात्रियों की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कपाट बंद होने से पहले रुद्रनाथ धाम पहुंचकर भगवान के दर्शन करने की अपील की।

3600 मीटर की ऊंचाई पर विराजमान हैं रुद्रनाथ

समुद्रतल से करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर चारों ओर से प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा है। यहां भगवान शिव के एकानन यानी मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव के संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में होती है। मंदिर के सामने नंदा देवी और त्रिशूल की ऊंची चोटियों का विहंगम दृश्य श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है। कठिन पैदल यात्रा के बावजूद प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के कारण हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुद्रनाथ धाम पहुंचते हैं।

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