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मौसम के बदले मिजाज ने रोका धराली में कल्प केदार मंदिर तलाशने का काम

Changing weather conditions have halted the search for the Kalp Kedar temple in Dharali.

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मौसम के बदले मिजाज ने रोका धराली में कल्प केदार मंदिर तलाशने का काम

अब तक करीब 40 फीट की जा चुकी है खुदाई, नजर आने लगी हैं मंदिर परिसर की दीवारें, बीते वर्ष पांच अगस्त को खीरगंगा नदी के सैलाब में धराली कस्बे के साथ समा गया था प्राचीन कल्प केदार मंदिर भी

देहरादून, 29 अक्टूबर 2026: उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित धराली कस्बे में मलबे के नीचे दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को तलाशने के लिए चल रहा खुदाई का कार्य गुरुवार को हल्की बर्फबारी के कारण रोकना पड़ा। मंदिर समिति केपदाधिकारियों के अनुसार, अब तक 35 से 40 फीट तक खुदाई की जा चुकी है और मंदिर परिसर की दीवारें दिखाई देने लगी हैं। उम्मीद है कि दस फीट के आसपास और खुदाई करने के बाद मंदिर का पता चल सकता है।

बीते वर्ष पांच अगस्त को खीरगंगा नदी के सैलाब में धराली कस्बे के साथ वहां स्थित प्राचीन कल्प केदार मंदिर का नामोनिशान भी मिट गया था। इस बार पांच अगस्त को आपदा की बरसी पर ग्रामीणों ने क्षेत्र के आराध्य सोमेश्वर देवता से मंदिर काे तलाश करने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद शारदीय नवरात्र के पहले दिन 11 अक्टूबर को खुदाई शुरू हुई। श्री कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि खुदाई के दौरान मंदिर के दोनों ओर की दीवारें नजर आने लगी हैं। एक स्थान पर अधिक गहराई होने के कारण पीछे की ओर
से एक्सावेटर मशीन नीचे उतारने के लिए मलबा हटाया जाएगा। गुरुवार को बर्फबारी के चलते यह काम नहीं हो पाया।

अब 50 से 60 फीट की गहराई में होगा मंदिर का गर्भगृह

मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार के अनुसार, प्राचीन कल्प केदार मंदिर का गर्भगृह पहले करीब सात फीट की गहराई में था। यदि मंदिर मलबे से बाहर निकला तो वर्तमान स्थिति में गर्भगृह 50 से 60 फीट तक गहराई में जा सकता है। ऐसे में वहां पहुंचना आसान नहीं होगा। साथ ही अधिक गहराई वाले स्थान पर पानी भरने का खतरा भी बना रहेगा। पंवार का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही पानी भरने की आशंका से निपटने के उपाय भी तलाशे जाएंगे।

Global Ganga News

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