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नंदा राजजात का दिनपट्टा महोत्सव 20 जनवरी से 

Dinpatta festival of Nanda Rajjat ​​from January 20

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नंदा राजजात का दिनपट्टा महोत्सव 20 जनवरी से

वसंत पंचमी पर 23 जनवरी को नौटी में निकाला जाएगा एशिया की सबसे लंबी धार्मिक पैदल यात्रा नंदा राजजात का दिनपट्टा (कैलेंडर), अगस्त-सितंबर में आयोजित होनी है राजजात

चमोली, 20 दिसंबर 2025: अगले वर्ष अगस्त दूसरे पखवाड़े से शुरू होने वाली एशिया की सबसे लंबी धार्मिक पैदल यात्रा नंदा देवी राजजात की तैयारियां जोरों पर  हैं। यात्रा के शुरुआती पड़ावों में लोग पुराने भवनों की मरम्मत और सजावट में जुटे हैं। वसंत पंचमी पर आगामी 23 जनवरी को मनौती और दिनपट्टा महोत्सव में शामिल होने को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। चार दिवसीय दिनपट्टा महोत्सव 20 जनवरी से शुरू होकर 23 जनवरी तक चलेगा। इसी दिन राजजात का दिनपट्टा (कैलेंडर) निकाला जाएगा।

शनिवार को चमोली जिले के नौटी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर परिसर में हुई पड़ाव समिति की बैठक में मनौती-दिनपट्टा महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। निर्णय हुआ कि इस दौरान नंदा देवी मंदिर में देवी पूजन व भजन-कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित होगा। 22 जनवरी को कांसुवा के राजवंशी कुंवरों और राजछंतौली का गांव की सीमा में परंपरागत वाद्ययंत्रों के साथ भव्य स्वागत होगा। इस मौके पर दो किमी क्षेत्र में राजछंतौली के साथ शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।

वसंत पंचमी पर्व पर मनौती और दिनपट्टा पूजन के बाद राजकुंवरों की ओर से राजजात का कैलेंडर जारी किया जाएगा। इसी दिन दोपहर दो बजे राजछंतौली को शैलेश्वर महादेव मंदिर में देवी नंदा के धर्म भाई लाटू देवता को सौंपने के बाद राजकुंवरों की कांसुवा गांव से विदाई होगी। दिनपट्टा महोत्सव में शामिल होने के लिए नंदा देवी राजजात से संबधित सभी पक्ष, बारह थोकी ब्राह्मण, चौदह सयाने, कुरुड़ के पंडित, गढ़वाल-कुमाऊं के राजवंशी प्रतिनिधि और 500 से अधिक स्थानों से देवडोली प्रतिनिधि आमंत्रित किए गए हैं।

नंदा देवी राजजात के प्रथम अनुष्ठान उफराई देवी मौडवी महोत्सव के बाद यह दूसरा बड़ा अनुष्ठान है। इसके बाद अगस्त में नंदा देवी राजजात आयोजित होगी। विदित हो कि 280 किमी लंबी नंदा देवी राजजात चमोली जिले के नौटी गांव से उच्च हिमालयी क्षेत्र होमकुंड तक 19 पड़ावों से होकर गुजरती है। इसमें पांच निर्जन पड़ाव भी शामिल हैं। यात्रा का सबसे ऊंचा पड़ाव उच्च हिमालयी क्षेत्र में 17,500 फीट की ऊंचाई पर पड़ता है। चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) इस यात्रा की अगुआई करता है।

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