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शांति का संदेश संपूर्ण धरा पर पहुंचाएं योग साधक

Yoga practitioners should spread the message of peace across the earth

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शांति का संदेश संपूर्ण धरा पर पहुंचाएं योग साधक

परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में चल रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने साधकों को दिया यह संदेश, कहा- योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा, समाज और विश्व को जोड़ने की दिव्य जीवन पद्धति है

देहरादून, 14 मार्च 2026 : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव में पहुंचे लोगों की जिम्मेदारी शांति का संदेश पूरी दुनिया को पहुंचाना है। यहां ईरान, इजरायल और यूएसए के लोग भी एक साथ बैठे हैं। यह पूरी दुनिया के लिए एकता, सद्भाव और शांति का संदेश है। राज्‍यपाल शनिवार को परमार्थ निकेतन में चल रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव बतौर मुख्‍य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा क‍ि गंगा तट पर बैठने का अनुभव ही अलग है। इससे निश्चित रूप से महोत्सव के प्रतिभाग कर रहे साधकों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया होगा। साधकों ने योग में श्वास, आसन व क्रिया को सीख लिया है। अब उन्हें शरीर, मन और आत्मा को परमात्मा से मिलाने की कला भी सीखनी है। सबको शांति का संदेश पूरी धरती पर पहुंचाना है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि साधक अपने साथ प्रकाश और मंत्रों को लेकर जाएं, ताकि यह प्रकाश पूरी दुनिया को फैल सके। कहा कि विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, आध्यात्मिक आचार्य, युवा, विद्यार्थी और योग साधक एक साथ गंगा तट पर एकत्रित हैं। यह दृश्य हमें स्मरण कराता है कि योग के माध्यम से विश्व में एकता, संतुलन और शांति स्थापित की जा सकती है। यह धरा एक बार फिर पूरे विश्व को यह संदेश दे रही है कि जब मानवता योग के मार्ग को अपनाती है, तब विभाजन की दीवारें स्वतः गिरने लगती हैं और एक नई वैश्विक चेतना का उदय होता है। डा. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि भारत की संस्कृति व माटी में समाहित ज्ञान अद्भुत है।

एक-दूसरे को समझने की शक्ति प्रदान करता है योग

स्विट्जरलैंड के संस्कृति मंत्री साइमन सेवन शाफर ने कहा कि योग और कूटनीति विभिन्न देशों के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। योग केवल आसनों का अभ्यास नहीं, बल्कि यह हमें नई ऊर्जा प्रदान करता है, तनाव को दूर करता है और पूरे विश्व को सद्भाव के सूत्र में बांधता है। इक्वाडोर गणराज्य के राजदूत फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास ने कहा कि योग हमें एक-दूसरे को समझने की शक्ति प्रदान करता है। यहां से एकता, शांति और सद्भाव अपने साथ लेकर जाना चाहते हैं। इस कठिन समय में परमार्थ निकेतन पूरी दुनिया में शांति का संदेश प्रसारित कर रहा है, यह वास्तव में अद्भुत है।

योग महोत्सव में सहभाग करना सौभाग्य

योगाचार्या पाउला तापिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग करना उनका सौभाग्य है। योगाचार्य स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट ने कहा कि महोत्सव पूरी दुनिया के योगियों के लिए अद्भुत अवसर है। यहां आना अचानक नहीं होता, यह मां गंगा का आमंत्रण है। महोत्सव में 80 देशों से 1,500 योग साधक, 75 योगाचार्य व आध्यात्मिक मार्गदर्शक हिस्सा ले रहे हैं।

योग व ध्यान साधना में मिले दिव्य अनुभव

योग महोत्सव में छठे दिन सुबह योग सत्र में साधकों ने विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास किया। ध्यान साधना में भी साधक लीन रहे। इस दौरान कई योग व ध्यान साधना में साधकों को दौरान अद्भुत अनुभूति हुई। गंगा तट पर प्रकृति के बीच योग साधना कर साधकों ने स्वयं को ऊर्जावान महसूस किया। योगासन, प्राणायाम और ध्यान में लीन साधकों को अद्भुत शांति की अनुभूति हुई। विभिन्न सत्रों में योग, ध्यान व अध्यात्म के महत्व पर आध्यात्मिक गुरुओं ने विचार रखे। सात दिवसीय योग महोत्‍सव का समापन रविवार 15 मार्च को होगा।

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